बुधवार, 11 जुलाई, 2007 को 09:23 GMT तक के समाचार
भारत की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ़्टवेयर निर्यातक कंपनी इन्फ़ोसिस टेक्नॉलॉजी लिमिटेड का इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शुद्ध मुनाफ़ा 34.5 फ़ीसदी बढ़ा है.
कंपनी के तिमाही नतीजे हालाँकि विश्लेषकों की भविष्यवाणी से बेहतर रहे, लेकिन शेयर बाज़ार में इन्हें समर्थन नहीं मिला.
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में शुरुआती कारोबार में इन्फ़ोसिस के शेयरों में साढ़े चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1930 रुपए पर बिका.
हालाँकि कंपनी का कहना है कि उसका यह मुनाफ़ा कहीँ अधिक होता, लेकिन डॉलर के मुक़ाबले रुपए की लगातार मज़बूती और बढ़ती मज़दूरी से उसका लाभ घटा है.
डॉलर का असर
इन्फ़ोसिस सबसे अधिक कारोबार अमरीका के साथ करती है और 60 फ़ीसदी राजस्व उसे वहीं से प्राप्त होता है.
कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी वी बालाकृष्णन ने बुधवार को समाचार एजेंसियों को बताया, "सभी विदेशी मुद्राओं के मुक़ाबले रुपए में मज़बूती से पहली तिमाही के शुद्ध लाभ पर असर पड़ा है."
घोषित नतीजों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में एक अप्रैल से 30 जून तक के पहले तीन महीनों में कंपनी की आय में 25 फ़ीसदी की वृद्धि हुई और यह 3773 करोड़ रुपए रही.
सभी टैक्स चुकाने के बाद इस तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 1097 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुक़ाबले 34.6 फ़ीसदी अधिक है.
कंपनी का कहना है, "इस तिमाही में 3730 नए कर्मचारियों को नियुक्ति की गई है."
लेकिन रुपए में कंपनी के लाभ में कमी आई है. वजह - इस तिमाही में रुपए का डॉलर के मुक़ाबले सात फ़ीसदी मजबूत होना रहा.
उल्लेखनीय है कि इन्फ़ोसिस की 73 प्रतिशत आय डॉलर में होती है.