गुरुवार, 21 जून, 2007 को 13:04 GMT तक के समाचार
सबसे अमीर भारतीय लक्ष्मीनिवास मित्तल को भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में निवेश करने की अनुमति मिल गई है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) में मित्तल के 49 फ़ीसदी निवेश को हरी झंडी दिखा दी.
मित्तल एनर्जी इनवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के इस निवेश के बाद एचपीसीएल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी से संयुक्त उपक्रम की श्रेणी में आ जाएगा.
इसके बाद एचपीसीएल और मित्तल एनर्जी मिलकर पंजाब के भटिंडा में गुरुगोविंद सिंह रिफ़ायनरी की स्थापना कर सकेंगे.
केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने मंत्रिमंडल के फ़ैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस रिफ़ायनरी परियोजना का काम तीन साल से अटका हुआ था.
अब तक एचपीसीएल ने एक्सॉन-एस्सो, सऊदी अरैमको, फ़्रांस के टोटाल और ब्रिटिश पेट्रोलियम के साथ साझा उपक्रम लगाने के लिए बात की थी लेकिन बात नहीं बनी.
एचपीसीएल में 49 फ़ीसदी हिस्सेदारी के लिए मित्तल एनर्जी इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड को 80 करोड़ डॉलर का निवेश करना होगा.
दासमुंशी का कहना था कि यह भारत में रिफ़ायनरी के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश होगा.
इतने बड़े पैमाने पर भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की किसी कंपनी को संयुक्त उपक्रम में नहीं बदला गया है.
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के शुरु होने से उत्तरी भारत में पेट्रोलियम की उपलब्धता बढ़ेगी और साथ ही पंजाब के लोगों को रोज़गार के अवसर मिलेंगे.
भारत सरकार को उम्मीद है कि मित्तल के जुड़ने की वजह से एचपीसीएल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना सकेगा.