गुरुवार, 31 मई, 2007 को 12:53 GMT तक के समाचार
निर्माण और सेवा क्षेत्र में मज़बूती के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में इस वर्ष की पहली तिमाही में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
हालाँकि अर्थव्यवस्था में ये उछाल बाज़ार की 9.4 प्रतिशत की उम्मीदों से कम है.
लेकिन बाज़ार के लिए संतोष की बात है कि ये वृद्धि पिछले साल की तिमाही में दर्ज 8.7 फ़ीसदी की वृद्धि से अधिक है.
जानकारों का मानना है कि अगले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था में थोड़ी सुस्ती आएगी क्योंकि सरकार तेज़ रफ़्तार विकास के नकारात्मक प्रभावों को कम करना चाहती है.
कुछ विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि महँगाई की एक वजह तेज़ आर्थिक रफ़्तार भी है.
वर्ष 2007 की पहली तिमाही में निर्माण और सेवा क्षेत्र दोनों में ही 12.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
इसी दौरान निर्माण उद्योग में 11 फ़ीसदी से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि कृषि क्षेत्र में मात्र 3.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
प्रदर्शन
एचएसबीसी के अर्थशास्त्री रॉबर्ट प्रायर वांड्सफोर्ड ने कहा, “वृद्धि दर वाकई उत्साहजनक है और इसे अर्थव्यवस्था का अच्छा प्रदर्शन माना जा सकता है. लेकिन हाल ही में ब्याज दरों में हुई वृद्धि के चलते इस प्रक्रिया को आगे ले जाने में कुछ मुश्किल आ सकती है.”
उन्होंने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि वर्ष 2007-08 में आर्थिक वृद्धि की दर 7.8 फ़ीसदी रहेगी.”
इसी साल मार्च में भारतीय रिजर्व बैंक ने अल्प अवधि ऋण दर यानी रेपो रेट को 7.5 फ़ीसदी से बढ़ाकर 7.75 प्रतिशत कर दिया था.
रेपो रेट वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक विभिन्न बैंकों को अल्प अवधि के लिए रिण मुहैया कराती है.
रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में तीन महीनों में दूसरी बार वृद्धि की थी और बैंक का कहना था कि ये निर्णय महँगाई पर नियंत्रण पाने के लिए किया गया.