शुक्रवार, 25 मई, 2007 को 16:46 GMT तक के समाचार
आलोक कुमार
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारतीय उद्योग संगठनों ने सामाजिक जवाबदेही निभाने के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सुझावों का स्वागत तो किया है लेकिन निजी क्षेत्र में आरक्षण की संभावना को नकार दिया है.
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि उद्योग जगत को आम आदमी के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियाँ याद रखनी चाहिए.
उन्होंने आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी तबकों तक पहुँचाने के लिए उद्योग जगत को आगे आने का भी अह्वान किया था.
सीआईआई और एसोचैम ने शुक्रवार को 'अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए सकारात्मक पहल' नाम से एक कार्ययोजना जारी करते हुए आश्वासन दिया है कि निजी कंपनियों में इन वर्गों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी लेकिन आरक्षण के बल पर नहीं.
सीआईआई के नए अध्यक्ष और भारती समूह के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा, "हम किसी भी क़ीमत पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से समझौता नहीं करेंगे. लेकिन हम दूसरे कई ऐसे उपाय कर रहे हैं जिनसे निजी क्षेत्र की भर्तियों में अनुसूचित जाति और जनजाति के युवाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा. आपको इन उपायों का असर एक साल के भीतर दिखने लगेगा."
उनका कहना था, "साथ ही हम ये भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि वर्तमान में निजी कंपनियाँ नियुक्तियों में किसी तरह का भेदभाव नहीं करतीं."
कार्ययोजना
एसोचैम और सीआईआई की साझा कार्ययोजना में कहा गया है, "कंपनियों को इस बात के लिए उत्साहित किया जाएगा कि वे उच्च पदों पर नई नियुक्तियों या पदोन्नति के ज़रिए अनुसूचित जातियों और जनजातियों का प्रतिनिधित्व बढ़ाएँ."
इसके साथ ही हर वर्ष बड़ी कंपनियाँ समाज के इन वर्गों में से एक-एक युवा का चयन करेंगी जिन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया जाएगा. पहले एक साल में इस तरह के 100 युवा तैयार किए जाएँगे जिनकी संख्या बाद में बढ़ती जाएगी.
सीआईआई अपने 'सेंटर ऑफ एक्सिलेंस' में अनुसूचित जाति और जनजातियों के युवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगी.
उद्योग जगत ने इन वर्गों के युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थानों यानी आईआईएम और अन्य विश्वविद्यालयों में कोचिंग कक्षाएँ चलाने में मदद देने की प्रतिबद्धता जताई है.
इसके तहत शुरू में दस विश्वविद्यालयों की पहचान की जाएगी जिनमें 10 हज़ार युवाओं को कोचिंग सुविधा दी जाएगी. वर्ष 2009 तक 50 शहरों में 50 हज़ार युवाओं को इस तरह की सुविधा देने का संकल्प लिया गया है.
कार्ययोजना में कहा गया है कि आईआईटी, आईआईएम और दूसरे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई पूर करने के लिए उद्योग जगत छात्रवृत्ति योजनाओं की शुरुआत करेगा.
व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में समाज के पिछड़े वर्गों को शैक्षणिक सुविधाएँ देने की घोषणा की गई है. इसके तहत वर्ष 2007 से शुरु हो रहे शैक्षणिक सत्र के लिए दस केंद्र खोले जाएंगे जहाँ पाँच हज़ार छात्रों को शैक्षणिक सलाह दी जाएगी.
एसोचैम और सीआईआई सामाजिक और आर्थिक रुप से पिछड़े 104 ज़िलों में सरकारी और नगरपालिका संचालित प्राथमिक स्कूलों की शिक्षा का स्तर उठाने में मदद करेगा. इस काम में ग़ैर सरकारी संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा.