उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बनने वाले एक विशेष आर्थिक ज़ोन यानी एसईज़ेड के प्रस्ताव को अपनी आपत्तियों के साथ केंद्र सरकार को भेजा है.
लखनऊ में मायावती के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने यह निर्णय लिया है, राज्य सरकार का कहना है कि इस प्रस्ताव में कई क़ानूनी प्रावधानों की अनदेखी की गई है.
राज्य के मंत्रिमंडलीय सचिव शंशाक शेखर सिंह ने पत्रकारों को बताया कि एसईज़ेड सिर्फ़ गैर खेतिहर ज़मीन पर ही बनाए जा सकते हैं जबकि इस मामले में किसानों की ज़मीन का अधिग्रहण होगा.
दिल्ली के निकट ग़ाज़ियाबाद में 1200 एकड़ में बनने वाली अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की इस परियोजना को मुलायम सरकार ने मंज़ूरी दी थी.
इस परियोजना को अभी केंद्र सरकार की अनुमति नहीं मिली है और राज्य सरकार की आपत्तियों के बाद इस परियोजना का विवादों में घिरना तय दिख रहा है.
समाचार एजेंसी यूएनआई का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस परियोजना को रद्द करने का मशविरा केंद्र सरकार को दिया है.
एजेंसी का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है जो पिछली सरकार की ओर से रखी गई एसईज़ेड, हाइटेक सिटी और आईटी पार्क की प्रस्तावित परियोजनाओं का आकलन करेगी.
विवाद
बंगाल के नंदीग्राम परियोजना और टाटा मोटर्स मामले की तरह इस परियोजना को लेकर भी काफ़ी विवाद हुआ है.
गाज़ियाबाद के किसानों ने रिलायंस की इस परियोजना का जमकर विरोध किया और लंबे समय तक वहाँ इसे लेकर काफ़ी तनाव रहा.
गाज़ियाबाद के किसानों को समर्थन देने पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह भी पहुँच गए थे.
अनिल अंबानी समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह से अपनी निकटता के कारण चर्चा में रहे हैं.
अभी तक समाजवादी पार्टी या अनिल अंबानी की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.