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गुरुवार, 19 अप्रैल, 2007 को 13:31 GMT तक के समाचार

'छह हज़ार अरब रुपए का निर्यात लक्ष्य'

विदेश व्यापार नीति की सालाना रिपोर्ट जारी करते हुए भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री कमल नाथ ने कहा है कि वर्ष 2006-07 के लिए क़रीब छह हज़ार अरब रुपए का लक्ष्य तय किया गया था जो पूरा हो गया है.

मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए लगभग आठ हज़ार अरब रुपए का निर्यात लक्ष्य रखा गया है.

सेवा उत्पाद के निर्यात को सेवा कर से मुक्त करने और व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात में तेज़ी लाने के लिए सरकार ने निर्यात नीतियों में विस्तार करने का फ़ैसला किया है.

उन्होंने कहा कि व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात के साथ-साथ भारत ने लगभग साढ़े तीन हज़ार अरब रुपए की सेवाओं का निर्यात किया.

व्यापार नीति की समीक्षा में कृषि उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई 'कृषि और ग्राम उद्योग योजना' का विस्तार करते हुए उसमें सोयाबीन, नारियल तेल और 'सूप' जैसे खाद्य पदार्थों को भी जोड़ दिया गया.

निर्यातकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय 'ड्यूटी एंटाइटलमेंट पासबुक' ( डीईपीबी) योजना को मार्च, 2008 तक के लिए बढ़ा दिया गया है. उसके बाद ही नई नीति तय की जाएगी.

फ़ोकस उत्पाद और फ़ोकस बाज़ार योजना में वस्तुओं की संख्या बढ़ा दी गई है और साथ ही इसमें 16 और देशों को जोड़ा गया है.

विशेष आर्थिक क्षेत्र

कमल नाथ ने कहा कि विशेष आर्थिक क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए निर्माणकर्ताओं को 'ड्यूटी रिफंड स्कीम्स' के अंदर रखा जाएगा.

कमलनाथ ने साथ में यह भी कहा कि वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 2008-09 में सरकार का निर्यात लक्ष्य क़रीब दस हज़ार अरब रुपए का होगा.

उन्होंने कहा कि विशेष आर्थिक क्षेत्रों ने बड़ी संख्या में अतिरिक्त नौकरियाँ पैदा की हैं और साथ ही निजी क्षेत्र से काफ़ी निवेश आकर्षित किया है.

अबतक 92 विशेष आर्थिक क्षेत्रों को मंजूरी दी जा चुकी है और क़रीब 50 पर तो निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है.

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर कमल नाथ ने कहा कि 2006-07 में देश में लगभग आठ सौ अरब रुपए का विदेशी निवेश हुआ जो पिछले साल क़रीब ढाई सौ अरब रुपए था.

विशेष कृषि उपज योजना का दायरा बढ़ाने से किसानों को सीधे फ़ायदा पहुँचेगा.

विदेश व्यापार नीति में कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखने की मुख्य वजह कृषि निर्यात और देश की कृषि-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है.

पिछले वित्तीय वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धिदर जहाँ 9.2 फ़ीसदी थी वहीं कृषि क्षेत्र की वृद्धिदर मात्र 2.7 फ़ीसदी थी.