सोमवार, 02 अप्रैल, 2007 को 07:58 GMT तक के समाचार
महँगाई पर लगाम कसने के भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियों का शेयर बाज़ार पर विपरीत असर हुआ और मुनाफ़ावसूली के दबाव में शेयर बाज़ारों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई.
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स ने 616 अंकों का गोता लगाया.
सेंसेक्स के इतिहास में यह दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है. इससे पूर्व, 18 मई 2006 को सेंसेक्स 826 अंक लुढ़का था.
उधर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ्टी में भी गिरावट आई और यह लगभग 188 अंक यानी पाँच फ़ीसदी नीचे आकर 3711.95 पर टिका.
सेंसेक्स में सोमवार को बाज़ार खुलने के साथ ही गिरावट का रुख रहा. दोपहर तक यह 400 अंकों से ज़्यादा गिर चुका था और अंतिम कारोबारी सत्र में भी यह संभल नहीं सका.
कारोबार बंद होते समय यह 616 अंकों की गिरावट के साथ 12455.37 पर बंद हुआ.
ब्याज़ दर का असर
रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को छोटी अवधि के लिए वाणिज्यिक बैंकों को देय ऋणों पर ब्याज़ दर यानी रेपो रेट चौथाई फ़ीसदी बढ़ाकर 7.75 प्रतिशत कर दिया था.
बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इसी फ़ैसले से शेयर बाज़ारों में गिरावट आई है.
इसके अलावा रिजर्व बैंक ने नक़द आरक्षण अनुपात यानी सीआरआर को भी छह प्रतिशत से बढ़ाकर साढ़े छह प्रतिशत कर दिया था. सीआरआर बैंकों की नगदी का वो हिस्सा होता है जो उन्हें रिजर्व बैंक में जमा रखना पड़ता है.
रिजर्व बैंक के इस फ़ैसले के बाद कई वाणिज्यिक बैंकों ने होम लोन पर ब्याज़ दरें बढ़ाने की घोषणा की है.
बाज़ार में गिरावट का सबसे अधिक असर बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों पर दिखा और एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों के दाम चार से पाँच फ़ीसदी गिर गए.
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से सिर्फ़ छह के शेयरों में मुनाफ़ा रहा जबकि 24 शेयरों के भाव गिर गए.
बीएसई में कुल 2546 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ जिनमें से 1771 के भाव नीचे आए.