शनिवार, 03 मार्च, 2007 को 13:06 GMT तक के समाचार
"वर्ष 2007-08 के इस बार के बजट में महिला संवेदनाओं को लेकर ज़्यादा जागृति दिखाई गई है और पिछली बार की ग़लतियों को दूर करनी की कोशिश की गई है."
बजट भाषण के दौरान भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम का ये व्क्तव्य अपने आप में इस बात का संकेत देता है कि इस बार बजट में महिलाओं पर विशेष ज़ोर दिया गया है.
वित्त मंत्री ने इसे 'जेंडर बजटिंग' की संज्ञा दी है.
जेंडर बजटिंग यानी विभिन्न योजनाओं में महिलाओं से जुड़े पहलूओं को शामिल करने की अवधारणा अपने आप में एक नई शुरुआत है.
आर्थिक विश्लेषक आलोक पुराणिक कहते हैं कि ऐसा पहली बार हुआ है कि बजट में महिलाओं की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए 'जेंडर बजटिंग' की बात कही गई है.
मुख्य बिंदु
बजट में कहा गया है कि 50 मंत्रालय और विभाग अपने यहाँ विशेष सेल बनाएँगे जो बजट में महिलाओं की ज़रूरतों पर ध्यान देंगे यानी आने वाले सालों में जो भी योजनाएँ बनेंगी उसमें वे महिला कल्याण का पहलू लेकर चलेंगे.
महिला और बाल कल्याण मंत्रालय का बजट 4898 करोड़ रुपए से बढ़ा कर 5853 करोड़ रुपए कर दिया गया है.
बजट में महिला संबंधी योजनाओं के लिए आवंटित राशि में बढ़ोत्तरी की गई है. ऐसी योजनाएँ जो पूरी तरह महिलाओं से संबंधित हैं, उनके लिए आठ हज़ार 795 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.
जबकि ऐसी योजनाएँ जिनका संबंध आंशिक तौर पर(कम से कम 30 फ़ीसदी) महिलाओं से है, उनके लिए 22,382 कोरड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.
आलोक पुराणिक कहते हैं कि हांलाकि जिस अर्थव्यवस्था की जीडीपी 32 लाख करोड़ रुपए हो उसमें महिलाओं के लिए केवल आठ हज़ार करोड़ रुपए की राशि बेहद कम है.
लेकिन आलोक पुराणिक ये भी मानते हैं कि बजट में महिलाओं की ज़रूरतों को महत्व देकर सरकार ने एक बुनियादी शुरूआत ज़रूर की है.
वैसे बजट का इंतज़ार घर में गृहणियों को ख़ास तौर पर रहता है-रोज़मर्रा की कौन सी चीज़ महँगी हुई और कौन सी सस्ती इसका सीधा असर उनके महीने के बजट पर पड़ता है.
आलोक पुराणिक कहते हैं कि जहाँ तक गृहण के बजट के बात है तो ये महँगा हुआ है.
वे कहते हैं, घर का बजट तभी कम होता है जब रोज़मर्रा की ज़रूरत वाली चीज़ों की कीमतें कम हों, लेकिन नमक, तेल, मोबाइल फ़ोन का बिल सब कुछ तो महँगा हो गया है, सैस लगने से महँगाई और बढ़ेगी.
मुद्रास्फ़ीति की बढ़ती दर किसी भी गृहणी के लिए चिंता का विषय है.
वैसे बजट में कामकाजी महिलाओं को आयकर दरों में कुछ ख़ास रियायत दी गई हैं. महिलाओं को अब एक लाख 44 हज़ार रूपए तक की आय पर कोई कर नहीं देना पड़ेगा. पहले ये सीमा एक लाख 35 हज़ार थी यानी एक हज़ार रुपए की राहत.जबकि पुरुषों के लिए ये सीमा एक लाख 10 हज़ार रूपए रखी गई है.
हालांकि आलोक पुराणिक कहते हैं कि ये मान लेना ग़लत होगा कि इन योजनाओं की नतीजे तुरंत मिलने लगेंगे.
उनका कहना है कि योजनाओं का असर दिखने में अभी कम से कम 15-20 साल का वक़्त लगेगा.
शायद बजट सकारात्मक पहलू ये है कि आर्थिक नीति और बजट बनाते समय इस महिलाओं की ज़रूरतों को भी सोच शामिल किए जाने की शुरुआत हुई है.