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बुधवार, 28 फ़रवरी, 2007 को 10:45 GMT तक के समाचार

हरवीर सिंह
वरिष्ठ पत्रकार

'कृषि क्षेत्र में न उठे क्रांतिकारी क़दम'

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने वर्ष 2007-08 के बजट में बहुत संतुलित नीति अपनाते हुए अर्थव्यवस्था की तेज़ विकास दर को जारी रखने की कोशिश की है.

लेकिन इस तेज़ विकास दर में कृषि और देश के 11 करोड़ किसानों की हिस्सेदारी बढ़ाने का कोई गंभीर प्रयास नहीं दिखता है.

यह बात अलग है कि महँगाई पर काबू पाने के लिए उन्होंने भारतीय कृषि के सामने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की चुनौतियों में कुछ इजाफा ज़रूर कर दिया है.

सिंचाई पर ज़ोर

लेकिन इसके साथ उन्होंने जहाँ ढाँचागत सुविधाओं और ख़ासतौर से सिंचाई पर अधिक ज़ोर देने की कोशिश की है, वहीं सस्ते कर्ज़ को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है.

वित्त मंत्री ने हालाँकि बजट भाषण में कृषि को प्राथमिकता देते हुए प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कथन को दोहराते हुए कहा कि हर चीज
इंतजार कर सकती है, लेकिन खेती नहीं.

खेती को मदद के उनके खाते में सस्ता ख़र्च ज़रूर जुड़ता है. एक लाख रुपए तक के कर्ज़ को सात फ़ीसदी की ब्याज दर पर रखते हुए उन्होंने 1677 करोड़ रुपए देकर सब्सिडी जारी रखी है.

साथ ही अगले साल के लिए कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाकर दो लाख 25 हज़ार करोड़ रुपए कर दिया गया है.

सहकारी बैंकों की पूँजी ज़रूरतों के लिए कर छूट वाले पाँच हज़ार करोड़ रुपए के बांड नाबार्ड जारी कर सकेगा.

वित्त मंत्री ने किसानों की आत्महत्या से प्रभावित 31 ज़िलों में 16 हज़ार 979 करोड़ रुपए के पैकेज को दोहराया है.

बीज उत्पादन

दालों की बढ़ती कीमतों से परेशान वित्त मंत्री ने इनकी उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से इसके बीज उत्पादन के लिए अनुदान देने की घोषणा की है.

कृषि के लिए आयोजना व्यय में मात्र एक हज़ार दस करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी कर इसे आठ हज़ार 50 करोड़ रुपए कर दिया गया है.

सिंचाई सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के लिए त्वरित सिंचाई कार्यक्रम के तहत परिव्यय को बढ़ाकर 11 हज़ार करोड़ रुपए कर दिया गया है, जिसमें राज्यों को अनुदान का हिस्सा 3580 करोड़ रुपए होगा.

वर्षा सिंचित क्षेत्रों के लिए बनाए गए प्राधिकरण के लिए मात्र 100 करोड़ रुपए का प्रावधान उन्होंने किया है.

जल स्रोतों के लिए उन्होंने राज्यों को विश्व बैंक से कर्ज़ लेने का रास्ता दिखाकर उसे प्रोत्साहित करने की बात कही है.

सब्सिडी

हालाँकि छोटे किसानों को भूजल के अतिउपयोग वाले इलाकों में डग वैल के लिए चार हज़ार रुपए की सब्सिडी देने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है.

कृषि विस्तार के ध्वस्त हो चुके ढाँचे को पटरी पर लाने की कोशिश के तहत जल संरक्षण पर किसान कार्यक्रम की शुरुआत की है.

हालाँकि इसके अलावा ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई उपकरणों को सीमा शुल्क से मुक्त रखा गया है, लेकिन इसका बहुत असर होगा इसकी गुंजाइश कम है.

इसके साथ ही खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को कर राहत देते हुए अप्रत्यक्ष रूप से किसानों को बेहतर दाम दिलाने की कवायद की है.

लेकिन किसानों की आय बढ़ाने का सीधा उपाय इस बजट में नहीं है.

लेकिन जिस तरह से उर्वरक सब्सिडी को 22 हज़ार 450 करोड़ रुपए के संशोधित अनुमानों पर रखा गया है, उससे लगता है कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बाद किसानों को खाद के अधिक दाम चुकाने पड़ सकते हैं.

किसानों को सीधे उर्वरक सब्सिडी प्रायोगिक योजना भी उन्होंने कही है.