भारतीय संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में उच्च विकास दर हासिल करने की संभावना जताई गई है. साथ ही बढ़ती महँगाई पर सरकार को आगाह किया गया है.
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मंगलवार को क्वात्रोकी मामले पर विपक्ष के भारी शोरगुल के बीच लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया.
इसमें कहा गया है कि महँगाई पर तुरंत रोक लगा पाना संभव नहीं है इसलिए सरकार को सोच समझ कर कोई नीतिगत फ़ैसला करना चाहिए.
सर्वेक्षण में कहता है, "चुनौती ऐसे उपाय करने की है जिससे महँगाई भी थमे और विकास दर पर भी कोई उलटा असर न पड़े. वित्त वर्ष 2007-08 के दौरान आर्थिक विकास दर 9.2 फ़ीसदी रहने की संभावना है."
खाद्य पदार्थों के भाव बढ़ने में वायदा कारोबार की भूमिका को नकारते हुए आर्थिक सर्वेक्षण में 'कमोडिटी एक्सचेंज' के कुछ सकारात्मक पहलुओं को उजागर किया गया है. हालाँकि इसके प्रबंधन में सुधार की गुंजाइश बताई गई है.
साथ ही अनाजों की आपूर्ति व्यवस्था दुरूस्त करने की ज़रूरत बताई गई है.
समान विकास
सब्सिडी के मामले पर बहस फिर शुरू करने की अपील की गई है. सर्वेक्षण में कहा गया है, सब्सिडी देने के वैकल्पिक रास्ते खुले हुए हैं. इन्हें कम से कम परीक्षण के तौर पर तो आजमाया जाना चाहिए.
सरकार के प्रदर्शन का रिपोर्टकार्ड माने जाने वाले इस सर्वेक्षण में आर्थिक असंतुलन, तेल क़ीमतों में ऊतार-चढ़ाव और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की दोहा दौर की वार्ता अधर में लटकने पर सरकार को आगाह किया गया है.
विकास में समाज के सभी तबके को समान रूप से भागीदार बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और ग़रीबी उन्मूलन पर विशेष रूप से ध्यान देने की ज़रूरत बताई गई है.
बुनियादी संरचना
सर्वेक्षण में बुनियादी संरचना को मजबूत बनाने के लिए और प्रयास करने की ज़रूरत बताई गई है.
औद्योगिक क्षेत्र में रोज़गार के अवसर बढ़ाने और श्रम क़ानूनों को लचीला बनाने की बात भी कही गई है.
इस सर्वेक्षण में बीमा और पेंशन फंडों को भी बुनियादी संरचना के विकास से जोड़ कर देखा गया है. इसमें कहा गया है, "बुनियादी संरचना का विकास इस पर होने वाले निवेश से तय होगा. इस तरह के निवेश के लिए लंबी अवधि के लिए धनराशि की ज़रूरत होगी जो बीमा और पेंशन फंडों से मिल सकती है."