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शुक्रवार, 23 फ़रवरी, 2007 को 01:58 GMT तक के समाचार

माइक्रोसॉफ़्ट पर बड़ा जुर्माना

दुनिया की सबसे बड़ी कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट पर बिना अनुमति के एमपी-3 डिज़िटल तकनीक इस्तेमाल करने के लिए डेढ़ अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया है.

अमरीका की एक जूरी ने माइक्रोसॉफ़्ट को आदेश दिया है कि वह एल्काटेल-लुसेंट को यह राशि अदा करे. यह पेटेंट के मामले में अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है.

एल्काटेल ने इस मामले में माइक्रोसॉफ़्ट पर मुक़दमा दायर किया था और कहा था कि ऑडियो को एमपी-3 में बदलने से उसके दो पेटेंट का उल्लंघन हुआ है.

माइक्रोसॉफ़्ट का कहना है कि उसे इस आदेश से आश्चर्य हुआ है क्योंकि उसने एमपी-3 तकनीक इस्तेमाल करने के लिए एक जर्मन कंपनी को एक करोड़ 60 लाख डॉलर अदा किए थे.

कंपनी का कहना है कि वह इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर करेगी. दूसरी ओर एल्काटेल ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर के बाज़ार में माइक्रोसॉफ़्ट का एकछत्र राज है.

सन् 1975 में न्यू मैक्सिको में इस कंपनी की नींव रखी गई थी. माना जाता है कि माइक्रोसॉफ़्ट ने पूरी दुनिया में कंप्यूटर क्रांति का सूत्रपात किया.

बिल गेट्स और उनके दोस्त पॉल एलन ने फ्रिज के आकार की मशीन को लोगों के टेबल तक पहुँचाने का सपना देखा था और यहीं से पर्सनल कंप्यूटर की शुरूआत हुई.

पिछले एक दशक से माइक्रोसॉफ़्ट के बिल गेट्स फोर्ब्स पत्रिका की अमीरों की सूची में पहले नंबर पर हैं.

माइक्रोसॉफ़्ट के एकाधिकार को अदालत में चुनौतियाँ दी गईं और उसे कई बार कठिन दौर से गुज़रना पड़ा लेकिन बिल गेट्स हमेशा की तरह मोर्चे पर डटे रहे.