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रविवार, 11 फ़रवरी, 2007 को 21:15 GMT तक के समाचार

वोडाफ़ोन की झोली में गया हच

वोडाफ़ोन ने 11.1 अरब डॉलर की बोली लगाकर भारत की चौथी सबसे बड़ी मोबाइल सेवा देने वाली कंपनी हचिसन-एस्सार के 67 प्रतिशत हिस्से पर अपना अधिकार बना लिया है.

हचिसन एस्सार के लिए सबसे बड़ी बोली वोडाफ़ोन की ओर से लगी जिसके मुताबिक कंपनी की कीमत 18.8 अरब डॉलर आँकी गई.

इसमें से 67 प्रतिशत हिस्सा ही दूसरी कंपनियों को दिया जाना था जबकि बाकी का 33 प्रतिशत भारतीय कंपनी एस्सार के पास ही है.

वोडाफ़ोन ने इस 67 प्रतिशत की क़ीमत यानी 11.1 अरब डॉलर की राशि के बदले 67 प्रतिशत हिस्से पर अपना अधिकार क़ायम कर लिया है.

इसके साथ ही वोडाफ़ोन ने भारत में तेज़ी से बढ़ रहे मोबाइल सेवा के क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है.

ग़ौरतलब है कि वोडाफ़ोन की पहले से ही एक भारतीय मोबाइल सेवा कंपनी, भारती एयरटेल में 5.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी है.

पीछे छूटे दिग्गज

इस दौड़ में ब्रिटिश कंपनी वोडाफ़ोन के अलावा रिलायंस कम्युनिकेशंस, एस्सार और हिंदुजा ने भी बोली लगाई थी पर सबसे बड़ी बोली वोडाफ़ोन की थी और इस तरह कंपनी के 67 प्रतिशत हिस्से पर उसका अधिकार हो गया है.

वोडाफ़ोन के मुख्य कार्यकारी अरुण शरीन ने इस बाबत कहा, "इस घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि मोबाइल सेवा के बढ़ते बाज़ार में अपना दखल बनाने की रणनीति पर हम किस तरह से काम कर रहे हैं."

मोबाइल कंपनी हचिसन-एस्सार में हॉंगकॉंग स्थित हचिसन टेलीकॉम इंटरनेशनल की 67 फ़ीसदी हिस्सेदारी थी और 33 फ़ीसदी हिस्सा भारतीय कंपनी एस्सार समूह का है.

हचिसन इस साझा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को बेचने का फ़ैसला किया था जिसके बाद दुनिया की कई बड़ी कंपनियाँ इसे हासिल करने को कोशिश कर रही थीं.

जानकारों का अनुमान था कि हच-एस्सार में हच के सारे शेयर ख़रीदने का सौदा 20 अरब डॉलर तक जा सकता है पर यह बोली अनुमान से एक अरब डॉलर कम पर ही सिमट गई.