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मंगलवार, 06 फ़रवरी, 2007 को 14:43 GMT तक के समाचार

शेयरों में निवेश पर लगाम लगाएगा चीन

चीन के केंद्रीय बैंक ने शेयर बाज़ार में हो रहे बेहिसाब निवेश पर नियंत्रण के लिए कुछ क़दम उठाने की घोषणा की है.

चीन में बड़ी संख्या में लोग उधार लेकर शेयरों में निवेश कर रहे हैं.

शंघाई के शेयर बाज़ार में सूचकांक पिछले साल एक सौ तीस प्रतिशत ऊपर चला गया यानी शेयरों के भाव दोगुने से भी अधिक हो गए.

नतीज़ा ये हुआ कि आम लोगों में शेयरों में पैसा लगाने की होड़ लग गई.

एक समय हालत ये थी कि एक दिन के भीतर 90 हज़ार लोग शेयरों की ख़रीद-बिक्री के लिए खाते खोल रहे थे.

यानी एक साल की अवधि में 35 गुना अधिक लोग शेयर बाज़ार से जुड़ गए और उनकी जेबें मोटी होने लगीं.

लेकिन पिछले सप्ताह ये स्थिति बदलनी शुरू हुई.दरअसल चीन सरकार इस बात से चिंतित हो उठी कि शेयरों के भाव बेक़ाबू हो रहे हैं और उनकी कीमतें बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही हैं.

सरकार ने कहा कि इस कारण उसे स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ सकता है.

असर

सरकार ने अपना इरादा जताया ही था कि बाज़ार में चिंता की लहर उठी और ऐसी उठी कि एक सप्ताह के भीतर शेयरों के भाव 12 प्रतिशत नीचे चले गए.

अब चीन के सरकारी बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ़ चाइना ने घोषणा की है कि वह लोगों की उधार लेकर शेयर बाज़ार में पैसे लगाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए कुछ सख़्त क़दम उठाएगा.

चीन में बहुत सारे लोग शेयरों के ज़रिए जल्दी कमाई करने के लिए क्रेडिट कार्ड पर उधार ले रहे हैं या घर तक गिरवी रख रहे हैं.

चीन के सरकारी टेलीविज़न पर लगातार ऐसी चेतावनियाँ दी जा रही हैं कि इस तरह से शेयर बाज़ार में निवेश करना एक ग़ैर ज़िम्मेदाराना और ग़ैरक़ानूनी काम है.

दरअसल चीन सरकार की चिंता स्वाभाविक है क्योंकि इससे पहले कई ऐसे उदाहरण देखे जा चुके हैं जब शेयरों के भाव गिरने से खलबली मच गई.

जब पैसे डूबे

सबसे ताज़ा उदाहरण अमरीका का है जहाँ वर्ष 2001 में कुछ समय के लिए मंदी आई और उसके बाद अचानक शेयर बाज़ार काफ़ी ऊपर चला गया.

लेकिन कुछ ही समय बाद नई तकनीक और दूरसंचार कंपनियों के शेयर ऐसे गिरे कि शेयर बाज़ार औंधे मुँह जा गिरा.

इसके कई साल पहले अमरीकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख ने चेतावनी दे दी थी कि शेयर बाज़ार में पैसे लगानेवालों की बेहिसाब समृद्धि का नतीजा गड़बड़ हो सकता है.

उनकी चेतावनी सही साबित हुई. शेयरों में गिरावट आई और इसके कारण वही थे जिससे चीन चिंतित है. उस समय अमरीका में लोगों ने उधार पर पैसे लेकर शेयर बाज़ार में लगाने शुरू कर दिए थे.

अमरीका से पहले नब्बे के दशक में पूर्वी एशिया में भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब शेयरों के भाव गिरे जिसका प्रमुख कारण बेहिसाब निवेश था.