बुधवार, 24 जनवरी, 2007 को 12:45 GMT तक के समाचार
इनवेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा विकास दर जारी रहने पर भारत एक दशक के भीतर दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
बैंक का कहना है कि इसी गति से विकास जारी रहने पर सदी के मध्य तक भारतीय अर्थव्यवस्था अमरीका से भी आगे निकल सकती है.
हालाँकि विकास की गति को बनाए रखने के लिए भारत को ऊर्जा ज़रूरतों पर काफी निवेश करना होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक एक दशक के भीतर भारतीय अर्थव्यवस्था इटली, फ्रांस और ब्रिटेन से आगे होगी.
यहाँ यह स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि अर्थव्यस्था का आकार बढ़ने का अर्थ ये नहीं है कि आर्थिक समृद्धि भी उसी अनुपात में बढ़ेगी.
इसके अलावा, देश की जनसंख्या के हिसाब से प्रति व्यक्ति आय को देखना होगा, मिसाल के तौर पर ब्रिटेन के मुक़ाबले भारत की जनसंख्या 20 गुना अधिक है इसलिए ब्रिटेन जैसी समृद्धि तक पहुँचने के लिए ब्रिटेन की तुलना में अर्थव्यवस्था का आकार 20 गुना बड़ा होना ज़रूरी है.
बैंक का मानना है कि लगभग डेढ़ दशक पहले शुरु हुए आर्थिक सुधारों का सकारात्मक प्रभाव भारत में दिखाई दे रहा है. इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और भारतीय कंपनियों की क्षमता भी बढ़ी है.
भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अभी लगभग नौ फ़ीसदी की दर से बढ़ रहा है और यही रुख़ जारी रहा तो वर्ष 2050 तक अमरीका भी पीछे छूट जाएगा. हालाँकि तब तक चीन पहले पायदान पर होगा.
रिपोर्ट के अनुसार 15 वर्षों के भीतर भारत की समृद्धि में चार गुना इजाफ़ा होगा. यहाँ कारों की बिक्री पाँच गुना बढ़ेगी और विकास के लिए ज़रूरी ऊर्जा की खपत भी तिगुना बढ़ेगी.
चेतावनी
रिपोर्ट में भारत की गुलाबी तस्वीर तो पेश की गई है लेकिन इसके साथ ही कुछ चिंताएँ भी जताई गई हैं.
ख़ासकर बुनियादी संरचना की मजबूती के बारे में कहा गया है कि ये विकास के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है.
बिजली की बिगड़ती स्थिति, जर्जर सड़कों और बंदरगाहों पर बढ़ रहे दबाव की चर्चा रिपोर्ट में की गई है. सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी के क्षेत्र में तीव्र विकास जारी रखने में विशेषज्ञ नौजवानों की कमी आड़े आ सकती है.