गुरुवार, 28 दिसंबर, 2006 को 11:43 GMT तक के समाचार
मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक भारतीय एस्सार समूह ने हचिसन- एस्सार में पूरी हिस्सेदारी ख़रदीने की बात कही है.
भारतीय समूह एस्सार के पास हचिसन-एस्सार की 33 फ़ीसदी हिस्सेदारी है.
इसका मतलब है कि मोबाइल कंपनी हचिसन- एस्सार में बड़ी हिस्सेदारी ख़रदीने की दौड़ में यूरोपीय कंपनी वोडाफ़ोन को अब एक और प्रतिद्वंद्वी का सामना करना पड़ सकता है.
पिछले हफ़्ते वोडाफ़ोन हचिसन-एस्सार में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की मंशा ज़ाहिर कर चुका है. रिलायंस कम्युनिकेशंस ने भी उसे ख़रीदने के लिए बोली लगाने की बात कही थी.
ब्रितानी अख़बारों के मुताबिक एस्सार ने हचिसन को पेशकश की है कि वो कंपनी को खरीदना चाहेगी और संयुक्त उपक्रम की क़ीमत 18 अरब डॉलर लगाई गई है.
अगर ये सौदा होता है तो ये वोडाफ़ोन के लिए धक्का होगा क्योंकि वो भारत जैसे बड़े बाज़ार में अपनी पैठ बनाना चाहती है.
हाँगकॉंग स्थित कंपनी हचिसन टेलीकॉम का कहना है कि उसकी 67 फ़ीसदी हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए कई कंपनियों ने इच्छा जताई है.
हचिसन टेलीकॉम का कामकाज थाईलैंड और इसराइल समेत कई देशों में है लेकिन अपनी 80 प्रतिशत आमदनी के लिए वो भारतीय हिस्सेदारी पर निर्भर है.
ये कंपनी हचिसन वैमपोआ गुट का हिस्सा है जिसने ऐसे संकेत दिए हैं कि 14 अरब डॉलर से ज़्यादा की पेशकशों को ही स्वीकार किया जाएगा.
वोडाफ़ोन की एयरटेल में 10 फ़ीसदी हिस्सेदारी है. एयरटेल भारतीय मोबाइल कंपनी बाज़ार में पहले नंबर पर है.
यूरोप में लगातार व्यापार विकास की मंद गति की वजह से वोडाफ़ोन कंपनी तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यस्थाओं में निवेश कर रही है.
भारत का मोबाइल फ़ोन बाज़ार दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ता हुआ बाज़ार है. हर महीने 60 लाख नए उपभोक्ता जुड़ रहे हैं.
भारत में कोई विदेशी हिस्सेदार मोबाइल कंपनी में 74 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रख सकता है.