मंगलवार, 19 दिसंबर, 2006 को 05:05 GMT तक के समाचार
आसित जौली
बीबीसी संवाददाता,चंडीगढ़
हरियाणा और पंजाब भारत के दूसरे सूबों की तरह विशेष आर्थिक ज़ोन बनाने की मौजूदा दौड़ में पूरी तरह शामिल हो चुके हैं.
हरियाणा में दिल्ली से लगे झज्जर में उद्योगपति मुकेश अंबानी अपनी नई कंपनी रिलायंस वेंचर्स के ज़रिए देश का अब तक का सबसे बड़ा एसईजेड स्थापति करने की तैयारी कर कर रहे हैं. यह 25 हज़ार एकड़ वर्ग क्षेत्र पर बनेगा. पंजाब में भी कई प्रोजेक्ट को मज़ूरी दी जा चुकी है.
मुकेश अंबानी कहते हैं कि गुड़गाँव और झज्जर ज़िले में बनने वाले एसईजेड पर उनकी कंपनी कुल मिलाकर 40 हज़ार करोड़ रुपए का निवेश करने जा रही है. इसके बनने के बाद न केवल इलाक़े के किसानों की हालत सुधरेगी बल्कि सूबे में बढ़ती हुई बेरोज़गारी पर भी रोक लग जाएगी.
इस एईजेड की हिमायत कर रहे उद्योगपति कहते हैं कि यहाँ कुछ ही वर्ष बाद राजधानी दिल्ली के आकार का एक पूरा नया शहर देखने को मिलेगा जो दुबई या शंघाई से भी ज़्यादा आधुनिक और सुंदर होगा.
हरियाणा और पंजाब सूबे की सरकारें भी इन विशेष आर्थिक ज़ोन को लेकर बहुत उत्साहित हैं.
उत्साहित सरकार
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा का दावा है कि अकेले रिलायंस एसईजेड से सूबे की तमाम मौजूदा मुश्किलें समाप्त हो जाएँगी.
उन्होंने कहा, “इस एक प्रोजेक्ट के ज़रिए हरियाणा में सौ अरब रुपयों का ताज़ा निवेश होगा. पाँच लाख बेरोज़गारों को नौकरियाँ मिलेगी. सूबे को 10 हज़ार करोड़ रुपए की आर्थिक सालाना आमदनी होने लगेगी.’’
मगर हरियाणा और पंजाब में एसईजेड की रिलायंस तक ही सीमित नहीं है.
हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन या एचसीआईडीसी के अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में राज्यभर में निजी क्षेत्र में 60 नए एसईजेड लगाए जाएंगे. इसी तरह पंजाब में भी अमृतसर से ले कर मोहाली तक 11 नए एसईजेड बनेंगे.
ग़ौरतलब है कि इन दोनों कृषि प्रधान राज्यों में यह सभी एसईजेड सारे देश के लिए अनाज पैदा करने वाली ऊपजाउ ज़मीनों पर लगाए जाने हैं.
इसी बात पर इन ज़मीनों के किसान मालिक और विपक्षी दल सड़क पर उतर गए हैं.
विशेष आर्थिक ज़ोन का विरोध कर रही विपक्षी पार्टियाँ माँग कर रही है कि इन्हें केवल बंजर और पिछड़े इलाकों में बनाया जाना चाहिए.
याचिका
हरियाणा में तो विपक्षी इंडियन नेशनल लोकदल के साथ साथ सत्ताधारी काँग्रेस पार्टी के ही एक सांसद कुलदीप बिश्नोई ने एसईजेड के ख़िलाफ़ सबसे बुलंद आवाज़ उठाई है.
पिछले दिनों बिश्नोई की ही एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस उद्योग, हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार को अलग-अलग नोटिस जारी किया है.
बिश्नोई ने अब मुख्यमंत्री हुड्डा को पत्र लिखकर माँग की है कि कृषि योग्य ज़मीन का अधिग्रहण कर उस पर उद्योग लगाने पर क़ानूनी रोक लगा दी जाए.
श्री बिश्नोई मानते हैं कि अगर अभी प्रस्तावित विशेष आर्थिक ज़ोन को मौजूदा शक्ल में अनुमति दे दी गई तो पहले से ही गहरे संकट में फँसे गरीब किसान परिवार पूरी तरह तबाह हो जाएंगे.
विपक्षी नेताओं का यह भी कहना है कि नए रोज़गार मुहैया करावाने के सरकारी वादे खोखले हैं.
कुलदीप बिश्नोई कहते हैं,‘‘नए उद्योगों में ज़्यादातर नियुक्तियाँ तकनीकी होंगी जिनके लिए हरियाणा के युवक प्रशिक्षित ही नहीं है.’’
उधर हरियाणा और पंजाब के किसान भी एसईजेड संबंधी सरकारी नीति का खुलकर विरोध कर रहे हैं.
किसानों का कहना है कि उन्हें उनकी पुश्तैनी रोज़ी-रोटी के साधन से मरहूम किया जा रहा है और ज़मीनों के वाजिब दाम भी नहीं दिए जा रहे हैं.
पिछले दिनों रोष जता रहे किसानों ने पंजाब के कई इलाक़ों में रेल और यातायात बाधित कर दिया.
उपयोगिता पर सवाल
पंजाब किसान सभा के भूपिंदर सिंह संभार ने आरोप लगाया, “सरकार लोक भलाई की अपनी ज़िम्मेदारी को छोड़ कर बड़ी औद्योगिक कंपनियों के लिए दलाली का काम कर रही है.’’
विशेष आर्थिक ज़ोन का विरोध कर रहे संपूर्ण क्राँति मंच की कार्यकारिणी के सदस्य योगेंद्र यादव का मानना है कि चीन की तर्ज़ पर बनाए जा रहे जोनों की भारत में ज़रूरत ही नहीं है.
उनका कहना है कि जोनों को ज़मीन के अधिग्रहण, किसानों को मिलने वाले मुआवजे और खरीदी जाने वाली ज़मीन के इस्तेमाल संबंधी सभी मामलों का खुलासा करना चाहिए.
मगर जहाँ पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने ज़मीन का अधिग्रहण करने से फिलहाल अपना हाथ खींच लिया है, वहीं दोनों अपनी एसईजेड नीति पर डटी हुई है.
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का कहना है कि पंजाब की सारी ज़मीन उपजाऊ हैं और अगर सूबे का औद्योगीकरण करना है तो ‘‘कुछ किसानों को तो अपनी ज़मीनें त्यागनी ही होंगी. ’’