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रविवार, 19 नवंबर, 2006 को 16:48 GMT तक के समाचार

अब डब्लूटीओ में शामिल हो पाएगा रूस

बारह साल चली बातचीत के बाद रूस और अमरीका ने द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके बाद रूस के विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) में शामिल होने का रास्ता खुल गया है.

हनोई में एशिया प्रशांत के नेताओं के सम्मेलन के दौरान 800 पन्नों के एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.

डब्लूटीओ में रूस की सदस्यता कई तरह के उद्योगों में शुल्क को कम करने से जुड़े इस महत्वपूर्ण समझौते पर निर्भर थी.

इससे पहले जुलाई में जी-8 देशों के सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए थे.

ऐतिहासिक क़दम

रूस के व्यापार और आर्थिक मंत्री जर्मन ग्रेफ़ ने कहा कि इस समझौते से रूस को विश्व बाज़ार में 'समान रूप' से प्रतिस्पर्धा का मौक़ा मिलेगा.

उन्होंने कहा, "यह एक अति महत्वपूर्ण मौक़ा है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रक्रिया में रूस की जुड़ने का संकेत है. यह एक ऐतिहासिक क़दम है जो विश्व बाज़ार के क़ायदे-क़ानूनों में रूस की वापसी की और इशारा करता है."

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा कि रूस को डब्लूटीओ सदस्यता दिलाने के लिए ज़रूरी यह व्यापार समझौता अमरीका की राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना संभव नहीं था.

अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि सूज़ैन श़्वाब ने भी इस समझौते का स्वागत किया.

उन्होंने कहा, "रूस का पूरी तरह से विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ जाना रूस के साथ-साथ अमरीका के लिए भी फ़ायदेमंद है."

इस समझौते की पुष्टि दोनों देशों में होनी ज़रूरी है. इसके अलावा रूस को डब्लूटीओ के साथ एक बहुपक्षीय समझौते को भी मंज़ूरी देनी होगी.

यानी इसका मतलब ये हुआ कि रूस को डब्लूटीओ की पूर्ण सदस्यता मिलने में अभी छह महीने का समय और लग सकता है.

प्रतिरोध

विश्व व्यापार संगठन के 149 सदस्य देशों में केवल अमरीका ही ऐसा सदस्य था जिसने डब्लूटीओ में रूस की सदस्यता पर अपनी सहमति नहीं दी थी.

रूस के मानवाधिकारों से संबंधित आँकड़े, मुख्य ऊर्जा स्त्रोतों पर सरकारी नियंत्रण, बौद्धिक संपत्ति का अधिकार और विदेशी कंपनियों की गतिविधियों पर रोक जैसी कुछ ऐसी आपत्तियाँ थीं जिनकी वजह से इस समझौते में देरी होती रहीं.

इसके अलावा ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं की वजह से रूस ने ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध का भी विरोध किया था जो अमरीका को पसंद नहीं आया था.

इस बीच रूस ने अमरीका से होने वाले मीट के आयात के दौरान उसकी साफ़-सफ़ाई के प्रति चिंता जताई है.