शुक्रवार, 27 अक्तूबर, 2006 को 03:30 GMT तक के समाचार
भारत में अपनी माँगों को लेकर शुक्रवार को लाखों की तादाद में बैंककर्मी एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर जा रहे हैं.
बैंककर्मी आउटसोर्सिंग, निजीकरण और निजी बैंकों में विदेशी निवेशकों को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों के विरोध में हड़ताल कर रहे हैं.
सरकार की ओर से हड़ताल को रोकने के प्रयासों के बावजूद इस दिशा में बैंक यूनियनों और अधिकारियों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई. एजेंसियों के मुताबिक बैंक यूनियनों ने हड़ताल की घोषणा कर दी है.
यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (यूएफ़बीयू) के हवाले से बताया गया है कि मुख्य श्रम कमिश्नर, यूएफ़बीयू और इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के बीच हो रही बातचीत नाकाम रही है और इसलिए शुक्रवार को हड़ताल के फ़ैसले में किसी तरह की परिवर्तन नहीं किया गया है.
यूएफ़बीयू की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया है कि हड़ताल के इस आह्वान के बाद देशभर के लगभग 10 लाख बैंककर्मी शुक्रवार को काम पर नहीं जाएंगे.
ग़ौरतलब है कि पिछले आठ दिनों में बैंक यूनियनों और श्रम कमिश्नर के बीच दो बार बातचीत हो चुकी है पर दोनों ही बैठक बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गईं और सरकार और बैंक यूनियनों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई.
माना जा रहा है कि इस हड़ताल का ज़्यादा असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर पड़ेगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार केनरा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारी भी इस हड़ताल का समर्थन करेंगे.