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मंगलवार, 17 अक्तूबर, 2006 को 23:56 GMT तक के समाचार

टाटा और कोरस सौदे के क़रीब

भारत की टाटा स्टील ब्रिटेन नीदरलैंड की स्टील कंपनी कोरस को ख़रीदने के सौदे के क़रीब है.

अगर ये सौदा हो जाता है तो टाटा दुनिया की पाँचवी सबसे बड़ी स्टील कंपनी बन जाएगी.

साथ ही भारत भी स्टील उत्पादन के क्षेत्र में एक ताकतवर औद्योगिक देश बनकर उभरेगा.

इसी साल मित्तल स्टील आर्सेलर स्टील को 34 अरब डॉलर में ख़रीदकर दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी बनी थी. इसीलिए सबकी नज़रें इस सौदे पर लगी हैं.

हाल ही में लंदन में जब भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ से इस बारे में पूछा गया था तो उनका जवाब था,'' टाटा भारत की बड़ी कंपनी है और उसे विश्व स्तर की कंपनी बनना चाहिए.''

आर्सेलर को ख़रीदने के लिए लक्ष्मीनारायण मित्तल को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था लेकिन उन्होंने भी हार नहीं मानी थी.

उस सौदे में भारत से लेकर यूरोप तक के कई वरिष्ठ राजनेता कूद पड़े थे.

मुश्किलें

अब सवाल ये उठता है टाटा के लिए कोरस को ख़रीदना कितना मुश्किल होगा.

जानकार कहते हैं कि मित्तल और आर्सेलर के सौदे से भारतीय कंपनियों के लिए नये रास्ते खुले हैं.

बीबीसी संवाददाता रॉडनी स्मिथ का कहना है कि सारे संकेत ये बताते हैं कि टाटा के प्रस्ताव को लेकर कोरस प्रबंधन को कोई बड़ी आपत्ति नहीं है.

कोरस ने अपने कई संवेदनशील दस्तावेज़ टाटा को दिए हैं जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कोरस इस मामले को लेकर गंभीर है.

सारा मामला इस बात को लेकर अटकता है कि टाटा कोरस को कितने में ख़रीदता है.

जहाँ तक कोरस का सवाल है ये सात साल पहले दो कंपनियों ब्रिटिश स्टील और डच हूगोवेंस के विलय से बनी थी. लेकिन दोनों ही कंपनियों के बीच काफ़ी मतभेद रहे.

यही कारण है कि इसी साल कोरस ने स्टील के अलावा अन्य कारोबार को बेच दिया. तभी स्पष्ट हो गया था कि कोरस स्टील व्यापार को भी बेच सकती है.

इससे पहले चाय कंपनी टाटा टी ने अपने से चार गुना बड़ी कंपनी टेटली को 43.2 करोड़ डॉलर में ख़रीद लिया था. इसके बाद वह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी चाय कंपनी बन गई थी.