शुक्रवार, 13 अक्तूबर, 2006 को 13:30 GMT तक के समाचार
भारत और यूरोपीय संघ ने व्यापार और निवेश समझौते की ओर पहला क़दम बढ़ाते हुए इस पर बातचीत शुरु करने का फ़ैसला किया है.
फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में दोनों पक्षों के बीच हो रहे शिखर सम्मेलन के दौरान इस पर सहमति बनी.
इस समझौते से यूरोपीय संघ के देशों और भारत के बीच आयात निर्यात होने वाले कुछ सामानों पर शुल्क की दर शून्य हो जाएगी.
हालाँकि भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे मुक्त व्यापार समझौता ठहराने से इनकार किया.
उन्होंने कहा, "हम भारत और यूरोपीय संघ के बीच विस्तृत व्यापार और निवेश समझौते पर बातचीत करने के लिए सहमत हो गए हैं. दोनों पक्षों के बीच कारोबार का 90 फ़ीसदी हिस्सा इसके दायरे में आएगा."
भारत और यूरोपीय संघ ने उम्मीद जताई है कि प्रस्तावित समझौते से दोनों आर्थिक शक्तियों के बीच मौजूद व्यापार बाधाएँ दूर हो जाएँगी.
दोनों पक्षों का कहना है कि यह द्विपक्षीय समझौता विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ के दायरे से अलग होगा.
ग़ौरतलब है कि कृषि सब्सिडी के मुद्दे पर डब्ल्यूटीओ के दोहा दौर की बातचीत अटकी हुई है.
निवेश का न्यौता
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूरोपीय कंपनियों को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्रों में निवेश करने का निमंत्रण दिया.
उन्होंन कहा कि विशेष आर्थिक क्षेत्रों में विस्तृत अवसर मौजूद हैं जिन्हें यूरोपीय कंपनियाँ भुना सकती हैं.
साथ ही प्रधानमंत्री ने कठोर वीज़ा नियमों का विरोध करते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के बीच कारोबारी सहयोग की क्षमता को प्रभावित कर सकता है.
उन्होंने कहा कि दूरसंचार और खुदरा कारोबार जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नीति, वित्तीय क्षेत्र और श्रम क़ानून को लचीला बनाते समय विदेशी कंपनियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा.