गुरुवार, 12 अक्तूबर, 2006 को 12:35 GMT तक के समाचार
वाणिज्य और उद्योग संगठन एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझा व्यापार अगले पाँच वर्षों में पाँच गुना बढ़ कर 100 अरब डॉलर पर पहुँच सकता है.
यूरोपीय संघ के सदस्य देशों और भारत के बीच अभी सिर्फ़ 20 अरब डॉलर सालाना का कारोबार होता है.
एसोचैम की रिपोर्ट 'भारत-ईयू व्यापार' के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कारोबार बढ़ाने के लिए ज़रुरी है कि भारत और यूरोपीय संघ 'समग्र आर्थिक सहयोग समझौते' के लिए सहमत हो जाएँ.
इस सिलसिले में भारत और यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच फ़िनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में शीर्ष स्तर पर बातचीत हुई है.
आयात-निर्यात
एसोचैम के अध्यक्ष अनिल कुमार अग्रवाल के मुताबिक धातु, रबर उत्पादों, खनिज, प्लास्टिक, रासायनों, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के भारतीय बाज़ार में यूरोप के लिए बड़े अवसर हैं.
अभी धातु और इससे बने सामानों के कुल आयात में यूरोपीय देशों की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत है. इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक सामानों का लगभग 19 फ़ीसदी हिस्सा यूरोपीय संघ के देशों से आता है.
रिपोर्ट के अनुसार यूरोप से निर्यात होने वाले ग़ैर इलेक्ट्रिकल सामानों और मशीनरी में भारत का हिस्सा सिर्फ़ डेढ़ प्रतिशत है. एसोचैम के मुताबिक आपसी सहयोग बढ़ने से यह आँकड़ा भी बढ़ सकता है.
यूरोपीय देशों से मशीनरी, कल पुर्जों, परमाणु रिएक्टरों और बायलरों का मुख्य रुप से निर्यात होता है. लेकिन इसका लाभ उठाने वाले देशों में अमरीका, चीन, स्विट्ज़रलैंड और तुर्की भारत से कहीं आगे हैं.
इन सामानों के आयात में भारत 18 वें पायदान पर है. रिपोर्ट कहता है कि आर्थिक सहयोग समझौता होने से भारत को भी यूरोपीय देशों में अपना निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी.