बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक टाटा स्टील ने एंग्लो-डच स्टील कंपनी कोरस के अधिग्रहण के लिए 9.3 अरब डॉलर की पेशकश की है.
टाटा समूह अगर कोरस का अधिग्रहण करने में कामयाब हो जाती है तो टाटा स्टील विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी स्टील कंपनी बन जाएगी.
साथ ही यह किसी भी भारतीय कंपनी द्वारा किसी विदेशी कंपनी के अधिग्रहण का सबसे बड़ा सौदा होगा.
पिछले सप्ताह टाटा स्टील ने कहा था कि वह भविष्य में कोरस सहित कई अन्य कंपनियों के अधिग्रहण के बारे में विचार कर रही है.
इधर ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से मिलने के लिए रतन टाटा इस हफ़्ते लंदन में होंगे.
कोरस कंपनी की संभावित ख़रीद की ख़बर लंदन के टेलीग्राफ़ अखबार में छपी थी जिसमें टाटा ने कोरस के लिए 6.5 अरब डॉलर की बोली लगाई थी.
बढ़ती माँग
भारत और चीन जैसे विकासशील देशों में स्टील की मांग बढ़ती जा रही है इसलिए यहाँ की स्टील कंपनियाँ अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने का हरसंभव प्रयास कर रही हैं.
चीन की कंपनियाँ भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं वहीं दूसरे देशों की कंपनियाँ स्टील इकाइयों के अधिग्रहण को अच्छा विकल्प मान रही हैं.
इस साल की शुरुआत में ही मित्तल स्टील ने 34 अरब डॉलर में आर्सेलर कंपनी को ख़रीदा था और वह दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी बन गई थी.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टाटा स्टील एक छोटी कंपनी है लेकिन भारत के विशाल टाटा समूह का समर्थन इस कंपनी को प्राप्त है.
1999 में ब्रिटिश स्टील और डच कंपनी होगोवेन को मिलाकर कोरस कंपनी का गठन किया गया था जिसके परिणाम स्वरूप हज़ारों लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था.
कोरस में लगभग 47 हज़ार लोग काम करते हैं और पिछले साल कोरस ने करीब 58 करोड़ डॉलर का लाभ कमाया था.