गुरुवार, 05 अक्तूबर, 2006 को 10:40 GMT तक के समाचार
उद्योग और वाणिज्य संगठन एसोचैम के अनुसार अगर समय रहते डेंगू की रोकथाम नहीं हुई तो भारतीय पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़ सकता है.
एसोचैम का कहना है कि सेवा क्षेत्र में पर्यटन की हिस्सेदारी पिछले दो वर्षों में 19 प्रतिशत से घट कर 13 प्रतिशत रह गई है और इस साल डेंगू के कहर से इसमें और गिरावट आ सकती है.
उल्लेखनीय है कि अक्तूबर से फरवरी के बीच के बीच सबसे अधिक विदेशी सैलानी भारत की ओर रूख करते हैं.
वाणिज्य संगठन की राय में वर्ष 2004 में आए सुनामी, पिछले वर्ष मुंबई की बाढ़ और एवियन फ्लू से पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़ा था. ऐसे में डेंगू की बीमारी को फैलने से नहीं रोका गया तो घरेलू पर्यटन उद्योग की कमर टूट जाएगी.
एसोचैम ने इस बीमारी की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार से ठोस नीति बनाने की माँग की है.
वर्ष 2004-05 में भारत में पर्यटन उद्योग को सिर्फ़ ट्रैवल के मद में साढ़े पाँच अरब डॉलर की आमदनी हुई जो इसके अगले वर्ष बढ़ कर छह अरब डॉलर से अधिक हो गई.
हालाँकि इस दौरान छुट्टियों के दौरान सैलानियों की आवक और इससे जुड़े कारोबार में विकास की गति धीमी हुई है.
डेंगू
भारत की राजधानी दिल्ली और इसके आस-पास के इलाक़े डेंगू से सबसे अधिक प्रभावित हैं.
अब तक डेंगू के दो हज़ार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और स्वास्थ्य मंत्री ए रामदॉस के मुताबिक इस बीमारी से देश भर में अब तक कुल 38 लोगों की मौत हो चुकी है.
देश के प्रतिष्ठित अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के एक छात्र की इस बीमारी से मौत हो चुकी है और कई जूनियर डॉक्टर डेंगू की चपेट में है.
ग़ौरतलब है कि भारत तेजी से मेडिकल पर्यटन का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है और कई देशों के मरीज़ यहाँ की चिकित्सा सुविधा का लाभ उठाने आते हैं लेकिन खुद मेडिकल छात्रों के डेंगू से बीमार होने से यह धंधा भी मंदा पड़ सकता है.