बुधवार, 04 अक्तूबर, 2006 को 15:45 GMT तक के समाचार
एक ताज़ा सर्वेक्षण में पाया गया है कि चीन और भारत की कंपनियाँ कारोबार करने के सिलसिले में विदेशों में रिश्वत देने के मामले में सबसे आगे हैं.
भ्रष्टाचार विरोधी अंतरराष्ट्रीय संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने चीन और भारत को 30 बड़े निर्यातक देशों की सूची में सबसे ऊपर रखा है जो रिश्वत देने को तत्पर रहते हैं.
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल का यह सर्वेक्षण दिखाता है कि भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए जो क़ानून लागू किए गए हैं उनका असर दिखना अभी बाक़ी है.
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल संगठन ने ही साल 2005 में एक अध्ययन कराया था जिसमें कहा गया था कि भारत में लोग बुनियादी सेवाएँ हासिल करने के लिए चार अरब अमरीकी डॉलर के बराबर रक़म हर साल रिश्वत के रूप में देते हैं.
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुख्य कार्यकारी डेविड मुसबाउम का कहना है, "आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के सदस्य देशों की कंपनियाँ दुनिया भर में रिश्वत देती हैं जबकि उनकी सरकारें भ्रष्टाचार विरोधी क़ानून लागू करने के बारे में बड़े-बड़े दावे करती हैं."
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के इस सर्वेक्षण में ऐसे देशों की सूची पेश की गई है जहाँ अधिकारी रिश्वत लेने के लिए तैयार रहते हैं. इस सर्वेक्षण में 125 देशों में 11 हज़ार व्यवसायियों से बातचीत की गई.
सर्वेक्षण में भाग लेने वालों के आधार पर उन देशों की सूची बनाई गई है जिनकी कंपनियां रिश्वत देने के लिए किस हद तक तैयार रहती हैं और उसी के अनुसार देशों को सूची में स्थान दिया गया है.
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल का कहना है कि उसने अपने सर्वेक्षण में तीस बड़े निर्यातक देशों की कंपनियों पर ज़्यादा ध्यान दिया है. ये तीस देश दुनिया भर में होने वाले निर्यात 80 प्रतिशत हिस्से के लिए ज़िम्मेदार हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि इसकी वजह शायद यह हो सकती है कि दोनों देशों में औद्योगिक प्रगति तेज़ी से हो रही है और संसाधनों की सख़्त ज़रूरत है.
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के सर्वेक्षण में रूस भी चीन और भारत के काफ़ी नज़दीक रहा है.
ईमानदार देश
दूसरी तरफ़ स्विट्ज़रलैंड को ऐसा देश कहा गया जहाँ की कंपनियाँ काम निकालने के लिए ग़ैरक़ानूनी तरीके इस्तेमाल करने के लिए बहुत कम तैयार नज़र आईं. स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया भी इस मामले में उसके नज़दीक रहे हैं.
तीस देशों की इस सूची में ब्रिटेन का स्थान छठा रहा और अमरीका और बेल्जियम संयुक्त रूप से नौवें स्थान पर रहे.
अलबत्ता फ्रांस और इटली को रिश्वत स्वीकार करने के मामले में काफ़ी ख़राब स्थान मिला है, फ्रांस 15वें स्थान पर और इटली 20वें स्थान पर रहा.
अफ्रीका में इस सर्वेक्षण में भाग लेने वालों में से काफ़ी ने इन देशों के बारे में कहा कि वहाँ अन्य पश्चिमी देशों के मुक़ाबले रिश्वत के लिए ज़्यादा खुले हुए हैं.
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल का कहना है कि यह दोहरे मानदंडों की मिसाल लगती है. एक तरफ़ तो अनेक पश्चिमी कंपनियाँ अपने देश में साफ़-सुथरे कारोबार पर ज़ोर दे रही हैं वहीं दूसरी तरफ़ औद्योगिक देशों से बाहर रिश्वत भी देती हैं.