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सोमवार, 25 सितंबर, 2006 को 16:25 GMT तक के समाचार

सिगरेट कंपनियों के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर

अमरीका में सिगरेट बनाने वाली कंपनियों के ख़िलाफ़ ग्राहकों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए एक मुक़दमा दायर किया गया है.

मुक़दमा दायर करने वालों का कहना है कि कंपनियाँ उपभोक्ताओं को ऐसा आभास देती हैं कि ‘लो टार’ यानी ‘कम कालिख’ वाली सिगरेट कम हानिकारक होती है.

अमरीकी संघीय अदालत ने यह मानते हुए इस याचिका को आगे की सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है कि एक बड़ा वर्ग इससे प्रभावित है.

इस मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार किए जाने के बाद ऐसा संभव है कि बहुत बड़ी संख्या में लोग ऐसा दावा करें कि उन्हें सिगरेट कंपनियों ने गुमराह किया है.

जानकारों के मुताबिक, अगर वास्तव में ऐसा साबित हो जाता है तो तंबाकू उद्योग को 200 अरब डॉलर तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है.

बचाव पक्ष में फिलीप मॉरिस, आरजे रेनोल्ड्स, ब्रिटिश अमरीकन टोबैको जैसी कंपनियाँ शामिल हैं. इनके साथ लोरिल्लार्ड टोबैको और लिजेट्ट ग्रुप जैसी कंपनियाँ भी हैं.

लो टार सिगरेट 1970 के दशक में बनने शुरु हुए थे.

मुकदमा दायर करने वाले वकीलों ने दावा किया कि इन कंपनियों ने ऐसी सिगरेटों को दूसरी सामान्य सिगरेटों से कम हानिकारक बताकर 120 से 200 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त कमाई अर्जित की.

अदालत के दरवाज़ा खटखटाने वाले वकील माइकल हॉसफेल्ड ने कहा कि ये कंपनियाँ अच्छी तरह जानती थीं कि वे मौत बेच रही हैं.

धूम्रपान का फेफड़े के कैंसर के साथ सीधा संबंध होने की पुष्टि पहली बार 1954 में की गई थी और उसके बाद से सिगरेट बनाने वाली कंपनियों पर एक के बाद एक मुकदमे होते रहे हैं.

कई मामलों में तो इन कंपनियों को मुआवज़े के तौर पर मोटी रकम भी अदा करनी पड़ी है.