रविवार, 24 सितंबर, 2006 को 11:20 GMT तक के समाचार
अदनान आदिल
बीबीसी न्यूज़, लाहौर
अमरीका में 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले से वहाँ रह रहे पाकिस्तानी लोगों की चिंता भले ही बढ़ गई हो लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए यह काफ़ी फ़ायदेमंद रहा.
दरअसल अमीरका में पाकिस्तानी मूल के लोग इस घटना के बाद अपने देश में संपत्ति अर्जित करने में ख़ासी रुचि दिखाने लगे और अपनी बचत का बड़ा हिस्सा स्वदेश भेजने लगे.
इससे पाकिस्तान के रियल इस्टेट बाज़ार में ज़बरदस्त उछाल आया है.
इसका सबसे अधिक असर कराची और लाहौर जैसे बड़े और तेज़ी से विकसित हो रहे शहरों में दिख रहा है. यहाँ के उच्च-मध्य वर्गीय आवासीय इलाकों में ज़मीन की माँग काफ़ी बढ़ गई है और दाम आसमान छूने लगे हैं.
अभी हाल में ही लाहौर के डिफ़ेंस हाउसिंग अथॉरिटी में तीन हज़ार अवासीय भूखंड के लिए 70 हज़ार आवेदन मिले हैं.
क़ीमतों में उछाल
11 सितंबर 2001 के बाद से अब तक डिफ़ेंस हाउसिंग अथॉरिटी में एक प्लॉट की क़ीमत 65 हज़ार डॉलर से 15 लाख डॉलर तक हो गई है.
बढ़ती माँग को देखते हुए डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी 2002 के बाद से पाँच आवासीय परिसर की योजना ला चुका है.
जौहर शहर के मध्य वर्गीय इलाक़े में भी ज़मीन के दाम 35 हज़ार डॉलर से एक लाख 32 हज़ार डॉलर हो गए हैं.
रियल इस्टेट के व्यवसाय से जुड़े साहिर चौधरी कहते हैं, "अगर 9/11 की घटना नहीं हुई होती तो लाहौर में ज़मीन-ज़ायदाद की क़ीमतों में इतनी उछाल न आती."
वो कहते हैं, "शहर में पिछले पाँच वर्षों में रियल इस्टेट की क़ीमतों में एक हज़ार गुना तक वृद्धि हो चुकी है."
ज़मीन-ज़ायदाद की क़ीमतों में आई उछाल से कई लोग बैठे-बैठे अमीर हो गए. मुश्किल से गुज़ारा करने वाले कई ग़रीब किसान आज शहरों के आसपास की अपनी ज़मीन बेचकर लखपति बन चुके हैं.
ऐसा ज़मीन की बढ़ती माँगों की वज़ह से शहरों के तेजी से फैलाव के कारण संभव हो पाया है.
संपन्नता
इसका असर लोगों के जीवनस्तर पर भी दिख रहा है. शहरों की सड़कें चमचमाती कारों से भरी दिखती हैं. बीएमडब्ल्यू और लेक्सस जैसी लग़्जरी कारों का गलियों में दिखना आम हो गया है.
कार ही लोगों की बढ़ती संपन्नता के एकमात्र प्रतीक नहीं रहा. तीन करोड़ से ज़्यादा मोबाइल फ़ोन उपभोक्ता और घरेलू उपयोग की आधुनिक मशीनों की बिक्री भी इसकी कहानी बयाँ करती हैं.
पाकिस्तान की बिजली कंपनी के शीर्ष अधिकारी तारिक़ हमीद कहते हैं, "‘रेफ़्रिज़रेटर, वाशिंग मशीन और एयर कंडीशनर की रिकॉर्ड बिक्री से बिजली की माँग में अचानक काफ़ी तेज़ी आई है."
ऐसा नहीं है कि इससे सिर्फ व्यक्तिगत संपन्नता में ही इज़ाफा हुआ है. इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की सेहत भी सुधरी है.
पाँच साल पहले पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर था और उसका विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ़ एक अरब डॉलर था. शेयर बाज़ार का सूचकांक एक हज़ार के स्तर तक पहुँच गया था.
लेकिन 9/11 के दो महीने बाद आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका के साथ आते ही उसका विदेशी मुद्रा भंडार चार अरब डॉलर हो गया. आज यह 12 अरब डॉलर है.
वर्ष 2001 में दूसरे देशों से तक़रीबन एक अरब डॉलर पाकिस्तान भेजे गए थे लेकिन 2002 से अब तक हर वर्ष औसतन चार अरब डॉलर भेजे जा रहे हैं.
यानी 2001 से 14-15 अरब डॉलर पाकिस्तान भेजे जा चुके हैं. इसकी वज़ह से गिरते रुपए को बल मिला है और आज यह एक डॉलर के मुकाबले 60-61 के स्तर पर स्थिर है.