लेबनान पर इसराइली हमलों से बढ़े तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें बहुत तेज़ी से चढ़ी हैं.
तेल की क़ीमतें बढ़कर 77 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची हैं और इसका असर दुनिया भर के शेयर बाज़ारों पर भी दिखने लगा है.
अमरीका में नैज़्डैक शेयर सूचकांक नौ महीने के सबसे निचले स्तर पर जा पहुँचा है जबकि डो जोंस में भी लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखी गई.
यूरोप के सारे शेयर बाज़ारों में कम से कम डेढ़ प्रतिशत की गिरावट देखी गई.
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार को मध्य पूर्व ही नहीं, नाइजीरिया से आने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी होने की आशंका सता रही है.
तेल के बाज़ार में आए इस उछाल से चीन और भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है जो अपनी ज़रूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं.
दिलचस्प बात ये है कि इसराइल और लेबनान, इन दोनों में से कोई भी देश तेल का निर्यात नहीं करता है लेकिन आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि तनाव बढ़ने की वजह से भविष्य में तेल की सप्लाई को लेकर आशंकाएँ गहरा गई हैं इसलिए दाम बढ़ रहे हैं.
लेबनान पर इसराइली हमले के बाद सीरिया और ईरान की ओर से जिस तरह के बयान आए हैं उससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आशंकाएँ गहरा रही हैं.
नाइजीरिया
मध्य पूर्व के अलावा अफ्रीकी देश नाइजीरिया से भी बुरी ख़बर है जहाँ दो पाइपलाइनों में धमाके हुए हैं.
नाइजीरिया में इतालवी कंपनी एजिप की पाइपलाइनों में विस्फोट हुआ है, कंपनी ने इन अटकलों का खंडन किया है कि यह तोड़फोड़ की कार्रवाई थी.
नाइजीरिया अफ्रीका का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और पिछले कुछ महीनों से जारी विद्रोहियों के हमलों की वजह से देश के तेल उत्पादन में पचीस प्रतिशत की कमी आई है.
दुनिया के चौथे सबसे बड़े तेल उत्पादक देश ईरान का परमाणु संकट पहले से जारी है जिसका बुरा असर तेल की क़ीमतों पर पड़ रहा है.