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शुक्रवार, 14 जुलाई, 2006 को 08:51 GMT तक के समाचार

जापान ने ब्याज़ दर बढ़ाई

जापान के सेंट्रल बैंक ने छह साल में पहली बार ब्याज़ दर में बढ़ोत्तरी करने का फ़ैसला किया है. अब ब्याज़ दर बढ़ाकर शून्य से 0.25 फ़ीसदी कर दी गई है.

जानकारों का कहना है कि इस फ़ैसले से जापान दुनियाभर में यह संकेत देना चाहता है कि दशकों से रुकी पड़ी उसकी अर्थव्यवस्था अब चल पड़ी है.

दो दिनों तक चले विचार-विमर्श के बाद बैंक ऑफ़ जापान ने इसकी घोषणा की. यह फ़ैसला जापान की मुद्रा नीति में आए बदलाव का भी संकेत है.

हालाँकि कई राजनेताओं ने बैंक से अपील की थी कि वह ब्याज़ दर न बढाए. उन्हें आशंका है कि ब्याज़ दर बढ़ाए जाने से अर्थव्यवस्था में सुधार का रास्ता रुक सकता है.

लेकिन बैंक ने इन आशंकाओं के बारे में जवाब देते हुए कहा है कि बैंक दर काफ़ी कम बढ़ाया गया है और वे इसे धीरे-धीरे बढ़ाएँगे.

लक्ष्य

ब्याज़ दर बढ़ाए जाने के बारे में सर्वसम्मति से लिए गए फ़ैसले के बाद एक बयान में बैंक ने कहा, "ब्याज़ दर बढ़ाए जाने के फ़ैसले से क़ीमतों में स्थिरता आएगी और हम दीर्घकालिक विकास का लक्ष्य हासिल कर पाएँगे."

जापान में सार्वजनिक ऋण का स्तर बहुत बड़ा है. यह वहाँ के सकल घरेलू उत्पाद का 150 प्रतिशत है. इसका मूल्य जापान में प्रति वर्ष बनने वाली सभी सामग्रियों और सेवा क्षेत्र का डेढ़ गुना है.

बैंक ऑफ़ जापान के इस फ़ैसले के बाद यहाँ कर्ज़ और महंगा हो जाएगा. यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब ऐसा लगने लगा था कि जापान की अर्थव्यवस्था में सुधार के लक्षण दिख रहे हैं.

बेरोज़गारी की दर पिछले आठ सालों में सबसे कम स्तर चार प्रतिशत तक पहुँच गई थी. जबकि सरकार ने विकास का लक्ष्य बढ़ाकर दो फ़ीसदी से भी ज़्यादा कर दिया था.

इसके बावजूद राजनेताओं ने ब्याज़ दर बढ़ाने पर अपनी आपत्ति जताई थी. लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस समय देश की अर्थव्यवस्था वर्ष 2000 से ज़्यादा अच्छी है.

हालाँकि बैंक के इस फ़ैसले के बावजूद शुक्रवार को जापानी शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज की गई. लेकिन गिरावट का कारण मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों का बढ़ना और मध्य पूर्व की स्थिति रही.