बुधवार, 05 जुलाई, 2006 को 15:23 GMT तक के समाचार
भारत की राजधानी दिल्ली में ब्रितानी उच्चायुक्त कार्यालय ने घोषणा की है कि ब्रिटेन में भारत के निवेश में 110 फ़ीसदी की ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है.
घोषणा के अनुसार भारत ब्रिटेन में निवेश करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है.
माना जा रहा है कि आने वाले सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के सबसे मज़बूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगी.
भारत की कई कंपनियाँ अब विदेशों में जाकर नई नई कंपनियाँ ख़रीद रही हैं.
ब्रिटेन के साथ मज़बूत ऐतिहासिक रिश्ता और अंग्रेज़ी भाषा की समानता के चलते भारतीय कंपनियाँ यूरोपीय देशों में ब्रिटेन को ही अपना आधार बनाना पसंद कर रही हैं.
लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर कई भारतीय कंपनियाँ लिस्ट हुई हैं.
बीबीसी संवाददाता नवदीप धारीवाल का कहना है कि अब ये चिंता जताई जा रही है कि भारत के साथ व्यापार के मामले में ब्रिटेन पिछड़ता जा रहा है. ख़ासकर ऐसे हालात में जब ब्रिटेन और भारत के बीच एक अलग तरह का रिश्ता है.
ब्रिटेन में व्यापार और उद्योग मामलों की समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में निवेश करने के मामले में ब्रितानी कंपनियाँ पीछे हैं.
अब भी ब्रिटेन में कई लोग भारत को एक उभरते हुए बाज़ार के बजाय ऐसे बाज़ार के रूप में ही देखते हैं जहाँ मानव संसाधन सस्ती कीमतों पर उपलब्ध है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ब्रितानी सांसदों की चिंता है यहाँ लोग अभी भी इसी सोच में सीमित हैं कि आउटसोर्सिंग के चलते उनकी नौकरियों को खतरा है.
पिछले साल ब्रिटेन में इंस्टीट्यूट ऑफ़ एशियन प्रोफ़ेशनल्स (आईएपी) ने कहा था कि ब्रिटेन की कुल जनसंख्या में भारतीय सिर्फ़ चार प्रतिशत हैं लेकिन अर्थव्यवस्था में उनका योगदान 10 प्रतिशत है.