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मंगलवार, 20 जून, 2006 को 14:47 GMT तक के समाचार

जेट-सहारा सौदे पर 'सवालिया निशान'

ऐसी ख़बरें हैं कि भारत की दो प्रमुख निजी विमान कंपनियों जेट एयरवेज़ और सहारा एयरलाइंस के बीच हुआ विमानन सौदा खटाई में पड़ सकता है.

वजह यह है कि सरकार ने अभी तक जेट एयरवेज़ के प्रमुख नरेश गोयल को सहारा एयरलाइंस के निदेशक मंडल में शामिल होने की इजाज़त नहीं दी है.

हालांकि दोनों कंपनियाँ इस बारे में कुछ भी कहने से बच रही हैं क्योंकि इस बारे में सरकार की ओर से कोई फ़ैसला आने में अभी दो दिन का वक्त बाक़ी है और उन्हें लगता है कि इस दौरान कोई सकारात्मक फ़ैसला आ सकता है.

जेट एयरवेज़ ने सहारा एयरलाइंस ख़रीदा

बताया जा रहा है कि अगर गोयल को बोर्ड में शामिल होने की अनुमति मिल जाती है तो इससे बाक़ी विमान सेवाओं पर काफ़ी असर पड़ेगा और जेट विमानन क्षेत्र की एक बड़ी ताकत के रूप में उभर सकता है जिससे उसका एकछत्र प्रभाव बाक़ी विमान सेवाओं को प्रभावित करेगा.

हालांकि सरकार की ओर से जेट एयरवेज़ को सहारा एयरलाइंस के अधिग्रहण की अनुमति मिल चुकी है और जेट इन्हें अपने अधिकार क्षेत्र में इस वर्ष अप्रैल से चला भी रहा है.

इसके बावजूद सरकार की ओर से गोयल को निदेशक मंडल में शामिल होने की अनुमति न मिलना इस सौदे को ख़त्म कर सकता है.

सौदा

दोनों कंपनियों के बीच इसी वर्ष जनवरी में लगभग 23 अरब रुपए के एक सौदे में जेट एयरवेज़ ने सहारा एयरलाइंस को ख़रीद लिया था.

ग़ौरतलब है कि इस सौदे की समयसीमा मार्च में ही ख़त्म होने वाली थी जिसे तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस सौदे के लिए जेट सहारा समूह को अभी तक 500 करोड़ रूपए की अग्रिम राशि का भुगतान भी कर चुका है.

भारतीय विमानन के इतिहास में अब तक का यह सबसे बड़ा सौदा था.

इससे पहले सहारा एयरलाइंस की ख़रीद को लेकर किंगफ़िशर विमानसेवा के प्रमुख विजय माल्या से भी बातचीत चल रही थी पर बाद में सौदा जेट के साथ ही तय हुआ.