http://www.bbcchindi.com

शुक्रवार, 09 जून, 2006 को 16:21 GMT तक के समाचार

कामकाज पर नींद भारी!

जापानी लोग आमतौर पर अपनी कठिन परिश्रम की प्रवृत्ति के लिए जाने जाते हैं लेकिन हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में पता चला है कि थकान का शिकार होने वाले लोगों की वजह से अर्थव्यवस्था को क़रीब 30 अरब डॉलर प्रतिवर्ष नुक़सान भी हो रहा है.

जापान के निहोन विश्वविद्यालय के औषधि विभाग ने एक सर्वेक्षण किया है जिसमें पता चला है कि काम के बोझ से दबे लोग काम के दौरान नींद को भगाने के लिए ख़ासी मेहनत करते हैं.

बहुत से लोग अक्सर नींद पूरी नहीं होने से दबाव में रहते हैं और इसकी वजह से काम पर भी देर से आते हैं या फिर आराम करने के लिए छुट्टी ही लेना पसंद करते हैं.

इसका असर यह हो रहा है कि उत्पादकता पर बहुत हद तक कम हो गई है.

निहोन विश्वविद्यालय का कहना है कि यह सर्वेक्षण करने का मक़सद लोगों में इस बारे में जागरूकता बढ़ाना है.

आलस्य नहीं थकान!

यह सर्वेक्षण करने वाले निहोन विश्वविद्यालय के औषधि विभाग के प्रोफ़ेसर और चेयरमैन मकोतो उशियामा का कहना है, "ऐसा नहीं है कि जो व्यक्ति काम के दौरान नींद का दबाव महसूस करता है, ज़रूरी नहीं की वह आलसी हो."

प्रोफ़ेसर मकोतो उशियामा का कहना था, "यह बहुत मुश्किल है कि आप अपने बॉस से कह सकें कि आपको नींद आ रही है लेकिन इस समस्या को नज़रअंदाज़ करना भी दीर्घकालीन दृष्टि से गंभीर नुक़सान की वजह बन सकता है."

जापानी लोग देर-देर तक काम करने और कठिन परिश्रमी के रूप में जाने जाते हैं. वहाँ ऐसी संस्कृति रही है कि लोग अपने सहयोगियों से पहले काम के स्थान से नहीं जाते हैं, चाहे काम का बोझ कितना ही क्यों ना हो.

अब ऐसा देखने में आ रहा है कि रेलगाड़ियों में लोग अक्सर सोते हुए नज़र आते हैं, हालाँकि प्रोफ़ेसर मकोतो उशियामा का कहना है कि ऐसे दृश्य दुनिया भर में कहीं भी नज़र आ सकते हैं.

उनका कहना है, "यह भी कहा जा सकता है कि यह सिर्फ़ जापान की समस्या है, लेकिन ऐसी नहीं है, दरअसल यह एक वैश्विक समस्या है."

सर्वेक्षण में जापान की एक रसायन कंपनी में 3075 लोगों से सवाल-जवाब किए गए.