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गुरुवार, 08 जून, 2006 को 06:47 GMT तक के समाचार

शेयर बाज़ार लगातार चौथे दिन लुढ़का

चौतरफ़ा बिकवाली के दबाव में भारतीय शेयर बाज़ारों में गुरुवार को भी तेज़ गिरावट आई. सेंसेक्स 460 अंकों की डुबकी लगा कर 9295.81 अंकों पर बंद हुआ.

इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी 136.10 अंको के नुकसान से 2724.35 अंकों पर टिका.

भारत के अलावा जापान, सिंगापुर, ताइवान और हांगकांग के शेयर बाज़ारों में भी तेज़ी गिरावट आई जिसका असर घरेलू बाज़ारों पर साफ़ दिखाई दिया.

अमीरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व की ओर से मंहगाई पर लगाम कसने के लिए ब्याज दरों में और वृद्धि किये जाने की संभावना जताने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक विकासशील देशों के शेयर बाज़ारों में निवेशित पूँजी पर मुनाफ़वसूली कर बाहर निकल रहे हैं.

इसी के परिणामस्वरूप सुबह एक घंटे में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 507 अंक लुढ़क कर 9249 अंकों पर आ गया था.

बाज़ार में सुबर से ही भारी उतार-चढ़ाव रहा और सेंसेक्स बुधवार की तुलना में लगभग 91 अंक नीचे में 9664.90 पर खुला और एक समय 9200.80 अंकों तक गिरा.

इस तरह पूरे दिन में लगभग 464 अंकों का उतार चढ़ाव दर्ज किया गया.

चौतरफ़ा बिकवाली

बिकवाली के दबाव में बीएसई में सूचीबद्ध 95 फ़ीसदी से ज़्यादा कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज़ की गई.

सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही.

उधर शेयर के वायदा कारोबार में भी मुनाफ़ावसूली का जोर रहा. निवेशक लंबे अरसे तक बाज़ार में बने रहने के बज़ाए बिकवाली कर रहे हैं.

बीएसई में मझोली कंपनियों के सूचकांक मिडकैप और छोटी कंपनियों के सूचकांक स्मॉलकैप में लगभग आठ प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई.

ग़ौरतलब है कि छोटे निवेशकों का रुझान इन्हीं कंपनियों के शेयर ख़रीदने में अधिक होता है.

विदेशी संस्थागत निवेशकों के साथ साथ घरेलू म्युचुअल फंड कंपनियाँ और ख़ुदरा निवेशक भी तेज़ी से मुनाफ़ावसूली कर रहे हैं.