शुक्रवार, 02 जून, 2006 को 17:25 GMT तक के समाचार
बोलीविया की सरकार ने अपने यहाँ लोहे की एक बड़ी खान में खनन करने का अधिकार भारत की एक कंपनी जिंदल समूह को दिया है.
बोलीविया सरकार के अधिकारियों ने कहा कि जिंदल इस्पात और ऊर्जा लिमिटेड ने खनन परियोजना में क़रीब दो अरब तीस करोड़ डॉलर का निवेश करने का भरोसा दिलाया है.
यह परियोजना बोलीविया की भी पहली लौह और इस्पात परियोजना होगी.
बोलीविया के योजना और विकास मंत्री कार्लोस विलेगास ने कहा कि उनकी सरकार ने आख़िरकार एक ऐसे प्रस्ताव में जान डाल दी है जो पिछले क़रीब पचास साल से लंबित पड़ा था.
इस परियोजना से बोलीविया में हज़ारों लोगों को रोज़गार मिलेगा और यह ख़बर सुनकर इस परियोजना वाले क्षेत्र में लोगों में ज़बरदस्त उत्साह का माहौल है.
कार्लोस विलेगास ने कहा, "यह एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ है जहाँ से बोलीविया कच्चा लोहा निर्यात करने वाले देश से एक ऐसा देश बन जाएगा जहाँ लोहे और इस्पात का उद्योग विकसित होगा."
जिंदल इस्पात और ऊर्जा उद्योग लिमिटेड ही एकमात्र कंपनी थी जो बोली लगाने की प्रक्रिया में टिकी रही. हालाँकि इस ठेके की अंतिम शर्तें और विवरण अभी तैयार किया जाना बाक़ी है और उन्हें दो महीने के भीतर तैयार करने की बात कही गई है.
कार्लोस विलेगास ने बताया कि इस सौदे को अभी कांग्रेस की मंज़ूरी मिलना बाक़ी है जिसके बाद ही जिंदल समूह इस परियोजना पर कामकाज शुरू कर सकेगा.
नीदरलैंड स्थित मित्तल स्टील कंपनी ने भी इस ठेके के लिए बोली लगाई थी लेकिन बोलीविया की सरकार ने उनकी बोली को अयोग्य घोषित कर दिया था.
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार जिंदल उद्योग समूह को इस खदान में 40 साल के लिए काम करने का अधिकार दिया जा रहा. इस परियोजना में बोलीविया की सरकार की 48 प्रतिशत भागीदारी रहेगी.
बोलीविया के राष्ट्रपति इवो मोरालेज़ ने देश के प्राकृतिक गैस उद्योग का एक महीना पहले ही राष्ट्रीयकरण किया था.