बुधवार, 31 मई, 2006 को 17:56 GMT तक के समाचार
भारत की अर्थव्यवस्था ने सन् 2006 के पहले तीन महीनों में उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है और 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की है.
कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की धुरी मानी जाती है और केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के अनुसार उसमें 5.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
इस साल पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में वर्ष 2005-06 में भारत में 8.1 प्रतिशत विकास दर की बात कही गई थी.
वहीं भारतीय रिज़र्व बैंक ने अप्रैल में अपनी वार्षिक नीति पर जारी बयान में भारत में वर्ष 2006-07 में विकास दर 7.5-8.0 फ़ीसदी के बीच रहने की उम्मीद जताई थी.
पिछले दो वर्षों में भारत में 8.5 और 7.5 फ़ीसदी की दर से विकास होता रहा है. लेकिन पहले तीन महीनों की वृद्धि दर अनुमानों से अधिक रही है.
बेहतर स्थिति
विकास दर के अलावा अगर आर्थिक प्रगति के दूसरे मापदंडों की बात करें तो भी भारतीय अर्थव्यवस्था काफ़ी बेहतर स्थिति में नज़र आ रही है.
सरकारी आंकडों के अनुसार 24 मार्च को ख़त्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार करीब 148.662 अरब डॉलर तक पहुँच गया. दूसरी ओर वर्ष 2005 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 33.8 फ़ीसदी की वृद्धि हुई.
भारत की गिनती अब दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में होती है. विश्व की अर्थव्यवस्था को चलाने में भारत बड़ा खिलाड़ी मना जाने लगा है.
लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि शहर के लोगों को तेज़ी से बढ़ती इस अर्थव्यवस्था का ज़्यादा लाभ हासिल हुआ है.
कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि ढांचागत, हवाई अड्डों, सड़कों और बिजली पर क्षेत्र में निवेश नहीं बढ़ेगा तो भारत की आर्थिक प्रगति सीमित रह जाएगी.
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ख़ुद भी चेतावनी दे चुके हैं कि बिना और आर्थिक सुधारों के इस विकास दर को बनाए रखना संभव नहीं हो पाएगा.