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रविवार, 21 मई, 2006 को 03:54 GMT तक के समाचार

सरकार की आश्वस्त करने की कोशिश

शेयर बाज़ारों में बीते कारोबारी हफ़्ते की भारी गिरावट के बाद भारत सरकार ने शेयरों में निवेश करने वाले विदेशी संस्थापक निवेशकों को आश्वस्त करते हुए सफ़ाई दी है कि उन पर कर लगाने की कोई योजना नहीं है

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने लंबी अवधि के शेयर कारोबार से प्राप्त होने वाली आय को पूंजीगत लाभ कर के दायरे में लाने से साफ़ इनकार किया है.

उन्होंने शनिवार के दिल्ली में पत्रकारों से कहा, “ शेयर बाज़ार में शेयरों की ख़रीद फ़रोख्त से हुई आय को पूंजीगत लाभ कर के दायरे में दोबारा शामिल करने की कोई योजना नहीं है”

उन्होंने मॉरिशस के साथ दोहरे कर से बचने संबंधी समझौते की समीक्षा से भी इनकार किया.

उल्लेखनीय है कि सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शेयर बाज़ारों में एफआईआई निवेश को कर दायरे में लाने और मॉरिशस के साथ कर समझौते के ख़त्म करने की मांग की थी.

माकपा ने कहा था कि एफआईआई मॉरिशस के रास्ते भारत में निवेश कर से छूट पा रहे हैं जिस पर लगाम लगाने की ज़रूरत है.

चिदंबरम ने कहा कि एफआईआई पर किसी तरह का कर नहीं लगाया जाएगा और इस तरह का भय गलत रिपोर्टिंग के कारण पैदा हुआ है.

वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मज़बूत है और इस बारे में किसी को कोई चिंता नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, “ हमारे पास 163 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है और पिछले कई हफ्तों से मँहगाई दर भी चार फ़ीसदी से नीचे है. साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में नौ प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है और मॉनसून ने भी दस्तक दे दी है.”

शेयर बाज़ार की गिरावट

उल्लेखनीय है कि पिछले पाँच कारोबारी दिनों में देश के दोनों मुख्य शेयर बाज़ारों बोम्बे स्टाक एक्सचेंज और नेशनल स्टाक एक्सचेंज में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के कारण भारी गिरावट दर्ज़ की गई.

सोमवार के बीएसई का तीस शेयरों वाल संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 463 अंक नीचे आया था और बाज़ार विश्लेषकों ने इसे दूसरे ब्लैक मंडे का नाम दिया लेकिन इसके बाद तो गिरावट का दौर और तेज़ हो गया था.

गुऱुवार को सेंसेक्स ने 826 अंकों की डुबकी लगाते हुए नीचे गिरने का इतिहास रच दिया. शुक्रवार को भी सेंसेक्स में 450 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई.