मंगलवार, 16 मई, 2006 को 09:03 GMT तक के समाचार
दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में जारी गिरावट के बीच डालर के भाव में आई कमज़ोरी के चलते अंतरराष्ट्रीय कारोबार में कच्चे तेल और सर्राफा बाज़ार में भी कमज़ोरी दिख रही है.
कई निवेशकों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है.
न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज में सोमवार को 'वायदक कारोबार' में कच्चे तेल की क़ीमतों में लगभग चार फ़ीसदी की गिरावट आने के बाद मंगलवार के एशियाई बाज़ारों में भी इसका भाव 70 डालर प्रति बैरल के नीचे आ गया.
इसके अलावा धातु बाज़ार में भी सुस्ती दर्ज की जा रही है.
तांबा और एल्युमीनियम की क़ीमतों पर पिछले दो तीन हफ्तों की तेज़ बढ़त के बाद ब्रेक लगा है और सोने का भाव में भी कमी आ रही है.
भारत के बहु जिंस बाज़ार में भी सोने का भाव सोमवार की तुलना में 74 रुपया नीचे आकर 10149 रुपया प्रति 10 ग्राम बोला जा रहा है.
डालर फिसला
उधर अंतर बैकिंग मुद्रा बाज़ार में विश्व की प्रमुख मुद्राओं के समक्ष अमरीकी डालर गोता लगा रहा है.
जापान में मंगलवार को एक डालर की कीमत 110.07 येन आंकी गई जबकि सोमवार के यह 110.49 येन पर बंद हुआ था.
यूरोपीय देशों की एकल मुद्रा यूरो भी डालर की तुलना में लगातार ऊपर निकल रहा है.
हालांकि चीनी करेंसी युआन के डालर की तुलना में गिरने पर अमरीका के कुछ राहत मिली है.
डालर के कमज़ोर पड़ने का फायदा अमरीकी निर्यातकों को मिलेगा क्योंकि इससे अमरीकी उत्पाद सस्ते होंगे.
चिंता का सबब
तेल, धातुओं और शेयरों के भाव पिछले दिनों रिकार्ड स्तरों पर पहुँचने के बाद विश्व अर्थव्यवस्था में मंहगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी.
ऐसी स्थिति में केन्द्रीय बैंकों को मुद्रास्फ़ीति पर लगाम कसने के लिए ब्याज़ दरों में और वृद्धि करना पड़ता है.
अमरीकी फ़ेडरल रिजर्व ने पिछले दिनों मुख्य ब्याज़ दर लगातार 16 वीं बार बढ़ाते हुए पाँच प्रतिशत कर दिया है.