सोमवार, 15 मई, 2006 को 11:53 GMT तक के समाचार
भारत के मुंबई शेयर बाज़ार के सूचकांक में सोमवार को 462.91 अंकों की ज़बरदस्त गिरावट दर्ज की गई.
दिन का कारोबार ख़त्म होने पर ये 11822.20 अंकों पर बंद हुआ.
दुनिया भर के मुख्य शेयर बाज़ारों में आई गिरावट के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से हुई ज़बरदस्त बिकवाली के चलते सूचकांक ने 462 अंकों का गोता लगाया.
इस वर्ष अब तक की यह सबसे बड़ी गिरावट है. इससे पूर्व 12 अप्रैल को सेंसेक्स में 306 अंकों की गिरावट आई थी.
सोमवार सुबह बाज़ार ख़ुलते ही सेंसेक्स ने नीचे का रुख़ कर लिया और फिर पूरे कारोबारी दिन इसमें तेज़ी नहीं आ सकी.
इस तेज़ गिरावट ने 17 मई 2004 के ब्लैक मंडे की याद ताज़ा करा दी. उस दिन बीएसई ने 565 अंकों का गोता लगाया था.
छोटी मझोली कंपनियों के सूचकांक बीएसई स्मालकैप और मिडकैप समेत पेट्रोलियम, आईटी, उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों के काउंटरों पर जम कर बिकवाली हुई.
ख़ास कर विश्व बाज़ार में एलुमिना, जस्ता के भाव गिरने से धातु सूचकांक में 11 फ़ीसदी से अधिक की गिरावट आई.
उधर नेशनल स्टाक एक्सचेंज का पचास शेयरों वाला सीएनएक्स निफ़्टी भी 147.10 अंक नीचे खिसक कर 3502.95 अंकों पर पहुँच गया.
आख़िर क्यों हुए निढ़ाल
सोमवार सुबह बाज़ार खुलने से पहले ही दुनिया के अन्य शेयर बाज़ारों की सुस्ती का पता चल चुका था.
अमरीकी शेयर बाज़ार लगातार दूसरे दिन गिरा और इस पर फ़ेडरल रिज़र्व की ब्याज़ दर लगातार बढ़ाने की मार पड़ी.
अन्य एशियाई सूचकांकों में जापान का निक्केई, हॉंगकांग का हैंगसैंग और कोरियाई कोस्पी भी नीचे रहा जिसका असर घरेलू बाज़ारों पर भी पड़ा.
विदेशी निवेशकों की ओर से हुई मुनाफ़ावसूली ने भी इसमें मुख्य भूमिका निभाई.
शेयर बाज़ार नियामक सेबी के आँकड़ों के मुताबिक 11 मई को एफ़एफ़आई 1199 करोड़ रुपए के शुद्घ बिकवाल बने और ख़ास कर वायदा कारोबार में उनका आकर्षण जाता रहा जिसका असर हाज़िर कारोबार पर भी पड़ा.
उधर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भी निवेशकों की चिंताएँ बढ़ी है और वे पुराने निवेश पर मुनाफ़ावसूली करने की फ़िराक में हैं.