शुक्रवार, 10 मार्च, 2006 को 16:50 GMT तक के समाचार
भारत में अरबपतियों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है जो यह दिखाता है कि व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.
प्रतिष्ठित फोर्ब्स पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार अरबपतियो की संख्या मे 15 प्रतिशत की वृद्घि हुई है और अब कुल 793 अरबपति है और एशिया में भारत अग्रणी बनकर उभरा है.
विश्व अर्थव्यवस्था में आई उछाल के कारण दुनिया भारत में अरबपतियो की संख्या में रिकॉर्ड बढोतरी हुई है.
इस सर्वे के अनुसार भारत में 23 अरबपति हैं जिनके पास भारतीय सकल घरेलू उत्पाद का 16 प्रतिशत हिस्सा है.
इसका यह अर्थ निकाला जा सकता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत बेहतर हो रही है. इकॉनॉमिक टाइम्स के ब्यूरो चीफ़ एमके वेणु का मानना है कि पहले से कहीं ज्यादा अवसर उपलब्ध हैं.
वेणु कहते हैं, “ इससे पता चलता है कि रूस और भारत में पहले से ज्यादा अरबपति हैं जो ये दिखाता है कि विकासशील अर्थव्यवस्था में मौके बढ़े हैं और विश्व अर्थव्यवस्था में केंद्र एशिया की ओर जा रहा है .”
जहाँ यह ये दर्शाता है कि भारत, रूस और चीन का विश्व बाज़ार में हिस्सा बढ़ रहा है, वहीं कुछ समाज वैज्ञानिकों और अर्थशास्त्रियों के लिए यह चिंता का विषय है.
विश्लेषक आनंद प्रधान कहते हैं, “अगर अरबपतियो की आय को देखें तो जो उनकी आय है हमारी अर्थव्यव्था की वृद्धि दर से कई गुना ज्यादा की दर से बढ रही है. साथ ही हमारी अर्थव्यवस्था में विषमता बढ रही है. यानी अमीरों और ग़रीबों की आय के बीच फ़र्क भी बढ रहा है.”
बाक़ी अमीर
लगातार बारहवें साल माइक्रोसोफ्ट के चेयरमैन बिल गेट्स पहले स्थान पर है जिनकी संपत्ति 50 अरब डालर आँकी गयी है.
इस वर्ष की सूची में दूसरे नंबर पर निवेशक वॉरेन बफ़े और भारतीय नागरिक लक्ष्मीनिवास मित्तल पाँचवे नंबर पर हैं.
इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास रिपोर्ट ही में कहा गया था कि बढ़ती वृद्धि दर सबके लिए बेहतर जीवन ला रही हो ऐसा नहीं है.
आनंद प्रधान का मानना है कि असमानताओं के दौर में इसका सामाजिक संतुलन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.