मंगलवार, 28 फ़रवरी, 2006 को 01:47 GMT तक के समाचार
भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम मंगलवार को सन् 2006-2007 का लोक सभा में बजट पेश करने जा रहे हैं.
माना जा रहा है कि आगामी पाँच राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए वित्त मंत्री इस बजट में सभी वर्गों को खुश करने की कोशिश कर सकते हैं.
दरअसल वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पास कोई क्रांतिकारी क़दम उठाने का विकल्प भी मौजूद नहीं है.
आर्थिक चिंतन के दो परस्पर विरोधी ध्रुव-कांग्रेस और वामपंथी सरकार चला रहे हैं. कुल मिलाकर इस बजट में इस राजनीति की छाया नज़र आ सकती है.
उधर आम बजट को लेकर वामपंथी पार्टियों ने अपने दबाव काफ़ी पहले बनाने शुरु कर दिया था.
वामपंथी पार्टियों का दबाव है कि कॉरपोरेट क्षेत्र को दी जाने वाली तमाम छूटों को कम किया जाए और उच्च वर्गों पर अधिक कर लगाया जाए.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री चिदंबरम ने आश्वासन दिया है कि यूपीए सरकार किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के ग़रीबों का पूरा ख्याल रखेगा.
प्रेक्षकों का अनुमान है कि बजट में कृषि के लिए एक पैकेज की घोषणा की जा सकती है.
आर्थिक सर्वेक्षण में भी कृषि की अच्छी तस्वीर पेश की गई है और कहा गया है कि कृषि विकास की दर 2004-2005 के 0.7 प्रतिशत से बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गई है.
चिदंबरम अपने बजट में ‘आम आदमी’ के लिए कुछ सुविधाओं की घोषणा भी कर सकते हैं.
उद्योग जगत को फ्रिंज बेनेफिट टैक्स को लेकर आपत्तियाँ रही हैं. इसमें कुछ सुधार की घोषणा की जा सकती है.
आयकर को लेकर वेतनभोगी वर्ग की मांग रही है कि इसकी सीमा बढ़ाई जाए. इसमें भी थोड़ी बढ़ोत्तरी की जा सकती है.
बजट के एक दिन पहले संसद में रखे गए आर्थिक सर्वेक्षण में 8.1 प्रतिशत की दर से विकास का अनुमान लगाया गया है. इसमें औद्योगिक और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी दर्शाई गई है लेकिन महँगाई और बजट घाटे में कमी के कोई संकेत नहीं हैं.
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि विकास की गति बरकरार रखने के लिए उद्योगों को भारी-भरकम टैक्स से छुटकारा दिलाना होगा और श्रम सुधार करने होंगे.
चिदंबरम के बजट में इन मुद्दों पर कुछ नई घोषणा हो सकती है.