सोमवार, 23 जनवरी, 2006 को 17:46 GMT तक के समाचार
कार बनाने वाली कंपनी फ़ोर्ड ने उत्तरी अमरीका में अपने 25 से 30 हज़ार कर्मचारियों की छँटनी की घोषणा की है. उत्तरी अमरीका में अपना कारोबार संभालने के लिए कंपनी अपने 14 प्लांट को भी बंद करेगी.
ये कटौती उत्तरी अमरीका में कंपनी के कर्मचारियों की संख्या की एक चौथाई है. यहाँ फ़ोर्ड को कार बनाने वाली एशियाई कंपनियों टोयोटा और निसान से कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है.
छँटनी को घोषणा से पहले कंपनी ने कहा था कि चौथी तिमाही में कंपनी का मुनाफ़ा 19 फ़ीसदी बढ़ा है. कंपनी को उम्मीद है कि इस वर्ष वह ग़ैर अमरीकी कार निर्माण व्यवसाय से लाभ कमाएगी.
फ़ोर्ड का लक्ष्य है वह वर्ष 2008 तक कार निर्माण में सालाना 26 प्रतिशत की कटौती करेगा. यानी एक साल में वह 12 लाख कम कार बनाएगा.
कंपनी ने घोषणा की है कि वह 2012 तक अपने 14 कार निर्माण केंद्रों को बंद कर देगी. जिन शहरों के प्लांट बंद किए जाएँगे, उनमें शामिल हैं- सेंट लुई, अटलांटा, विक्सम.
इसके अलावा ओहायो स्थित बाटविया ट्रांसमिशन प्लांट भी बंद किया जाएगा. कंपनी के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिल फ़ोर्ड ने बताया, "हम ये बलिदान इसलिए कर रहे हैं ताकि फ़ोर्ड की धरोहर और कंपनी का भविष्य सुरक्षित रखा जा सके."
कमाई और नुक़सान
वर्ष 2005 के आख़िरी तीन महीनों में फ़ोर्ड की कमाई थी- 12 करोड़ 40 लाख डॉलर. जबकि 2004 में इसी समय कंपनी की कमाई थी- 10 करोड़ 40 लाख डॉलर.
लेकिन कमाई बढ़ने में भूमिका निभाई कंपनी की वित्तीय शाखा ने. जबकि हर्ट्ज़ रेन्टल कार व्यवसाय को बंद करने से भी कंपनी को राहत मिली.
लेकिन फ़ोर्ड के प्रमुख ऑटो डिविज़न को टैक्स देने से पहले ही एक करोड़ 20 लाख डॉलर का नुक़सान हुआ था.
हालाँकि वर्ष 2005 में पूर्ण रूप से कंपनी आय रही दो अरब डॉलर. जबकि वर्ष 2004 में यह आँकड़ा था साढ़े तीन अरब डॉलर.
दुनियाभर में कंपनी के ऑटो उद्योग को टैक्स से पहले 2005 में एक अरब डॉलर का नुक़सान हुआ. जबकि 2004 में कंपनी ने टैक्स चुकाने से पहले 85 करोड़ डॉलर की कमाई की थी.
फ़ोर्ड अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जिसने एशियाई और यूरोपीय कंपनियों की चुनौती की सामना करने के लिए इतने बड़े पैमान पर छँटनी की.
पिछले साल जनरल मोटर्स (जीएम) ने भी उत्तरी अमरीका में 30 हज़ार नौकरियों की कटौती की थी ताकि कंपनी हर साल ढाई अरब डॉलर बचा सके.
इसके अलावा कार पार्ट्स बनाने वाली कंपनी डेल्फी को भी बाज़ार में जारी प्रतियोगिता के कारण पिछले साल अक्तूबर में कंपनी को दिवालिया घोषित करने के लिए अर्ज़ी दाख़िल की.