गुरुवार, 22 दिसंबर, 2005 को 01:32 GMT तक के समाचार
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का कार्यकारी बोर्ड 19 बेहद ग़रीब देशों का क़र्ज़ माफ़ करने पर सहमत हो गया है.
मुद्रा कोष का यह फ़ैसला आठ विकसित देशों की जुलाई में स्कॉटलैंड में हुई बैठक में लिए गए फ़ैसले को लागू करने की दिशा में अगला क़दम है.
उस सम्मेलन में विकसित देशों न ग़रीब देशों का क़र्ज़ माफ़ करने की योजना की घोषणा की थी.
लेकिन मुद्रा कोष ने पश्चिम अफ्रीकी देश मौरितानिया को क़र्ज़ राहत देने से तब तक इनकार कर दिया है जब तक कि वह अपनी नीतियों में कुछ बदलाव नहीं करता.
बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददाता मार्क ग्रेगरी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने ऐसे बेहद ग़रीब देशों का क़र्ज़ माफ़ करने का फ़ैसला किया है जिनकी सालाना प्रतिव्यक्ति आय 380 डॉलर से कम है.
इस फ़ैसले से पहले अटकलें लगाई जा रही थीं कि 20 देशों की सूची में से छह देशों को इस राहत से वंचित रखा जा सकता है, जब तक कि वे अपने यहाँ आर्थिक सुधारों के लिए तैयार नहीं होते हैं.
पश्चिम अफ्रीकी देश मौरितानिया को क़र्ज़ राहत देने से इनकार के लिए यह तर्क दिया गया है कि वहाँ कुछ नीतियों में संतोषजनक प्रगति नहीं हुई है.
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के एक प्रवक्ता ने कहा कि हो सकता है कि इस प्रक्रिया में ज़्यादा लंबा समय ना लगे, और हो सकता है कि सिर्फ़ कुछ सप्ताहों का ही समय लगे.
मोटे तौर पर देखें तो मुद्रा कोष आठ विकसित देशों की योजना को ही लागू कर रहा है जिस पर जुलाई 2005 में स्कॉटलैंड में सहमति हुई थी.
इस योजना में कुछ बेहद ग़रीब देशों को तीन अरब तीस करोड़ डॉलर तक की क़र्ज़ राहत मिलेगी जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को अदा करना था.
दो अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थाएं - विश्व बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक को अभी इस बारे में फ़ैसला करना है कि क्या उन्हें भी ग़रीब देशों पर क़र्ज़ माफ़ कर देना चाहिए या नहीं.
संभावना तो यही जताई जा रही है कि विश्व बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक भी आठ विकसित देशों की योजना को ही आगे बढ़ाएंगे.