बुधवार, 30 नवंबर, 2005 को 08:20 GMT तक के समाचार
भारतीय अर्थव्यवस्था ने इस वर्ष की दूसरी तिमाही में उम्मीदों से ज़्यादा आठ प्रतिशत वृद्धि दर्ज की है.
प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने साढ़े सात प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद ज़ाहिर की थी लेकिन यह वृद्धि उससे आधा प्रतिशत ज़्यादा रही है.
कृषि और खदान क्षेत्रों में हो रहे ख़राब प्रदर्शन पर पार पाते हुए अर्थव्यवस्था में यह वृद्धि मौजूदा वित्त वर्ष की लगातार दूसरी तिमाही में दर्ज की गई है.
भारत के केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने जो आँकड़े जारी किए हैं उनके अनुसार सकल घरेलू उत्पाद में साल 2004-05 में जुलाई-सितंबर की तिमाही में यह वृद्धि 6.7 प्रतिशत थी जो वर्ष 2005-06 में आठ प्रतिशत रही है.
हालाँकि दूसरी तिमाही में हुई यह वृद्धि पहली तिमाही में हुई 8.1 प्रतिशत की वृद्धि से कुछ कम है. अप्रैल-जून की तिमाही में यह वृद्धि 8.1 प्रतिशत रही थी.
जबकि पिछले वित्त वर्ष की आख़िरी छमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी.
मौजूदा वित्तीय वर्ष में यह आर्थिक वृद्धि प्रधानमंत्री और अन्य आर्थिक विश्लेषकों के अनुमान से कहीं ज़्यादा है.
कृषि क्षेत्र ने दो प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है जबकि वित्तीय वर्ष 2004-05 में इसी अवधि में इस क्षेत्र में शून्य प्रतिशत वृद्धि हुई थी.
निर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर कुछ कम 9.2 रही है है जो साल 2004-05 की इसी अवधि में हुई 9.6 प्रतिशत से कुछ कम है.
जहाँ तक सेवाओं का सवाल है तो व्यापार, होटल, परिवहन और संचार क्षेत्रों में विकास दर सबसे ज़्यादा 12 प्रतिशत रही है जबकि पिछले साल यह 12.3 प्रतिशत रही थी.
वित्त, बीमा, अचल संपत्ति और कारोबारी सेवाओं में वृद्धि दर 9.9 दर्ज की गई जबकि पिछले साल इसी अवधि में इनकी वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रही थी.