मंगलवार, 25 अक्तूबर, 2005 को 11:01 GMT तक के समाचार
भारतीय रिज़र्व बैंक ने लघु अवधि के ब्याज की दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की घोषणा की है. अब यह बढ़कर 6.25 हो गई है.
ऐसा तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई में संभावित बढ़ोत्तरी के मद्देनज़र किया गया है. इस साल रिज़र्व बैंक ने दूसरी बार दरों में वृद्धि की है.
बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद का कहना है कि विशेषज्ञों ने पहले ही सरकार के तेल की कीमतों में सात फ़ीसदी की वृद्धि के बाद ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की उम्मीद जताई थी.
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लघु अवधि की ब्याज दरों का गृह और कार के लिए दिए जानेवाले कर्ज़ों पर असर नहीं पड़ेगा क्योंकि बैंकों के पास जमा राशि की भरमार है.
रिज़र्व बैंक गवर्नर ने वित्त वर्ष 2005-06 की दूसरी छमाही की मौद्रिक और कर्ज़ नीति की घोषणा करते हुए कहा है कि बिना समुचित उपाय उठाए महंगाई की दर 5 से 5.5 रखना मुश्किल होगा.
लेकिन रिज़र्व बैंक ने बैंकों को दिए जानेवाले दीर्घ अवधि के कर्ज़ में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
इसे छह फ़ीसदी की दर पर रखा गया है. यह पिछले तीन दशकों के सबसे कम स्तर पर है.
रिज़र्व बैंक ने सालाना विकास दर का अनुमान 7 से 7.5 फ़ीसदी लगाया है.