शुक्रवार, 02 सितंबर, 2005 को 09:44 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन में रहने वाले भारतीयों का अर्थव्यवस्था में योगदान उनकी संख्या के अनुपात में ढाई गुना से अधिक है.
भारतीय मूल के ब्रितानी देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 100 अरब पाउंड यानी लगभग आठ हज़ार अरब रूपए का योगदान करते हैं.
इंस्टीट्यूट ऑफ़ एशियन प्रोफ़ेशनल्स (आईएपी) का कहना है कि भारतीय ब्रिटेन की कुल जनसंख्या में सिर्फ़ चार प्रतिशत हैं लेकिन अर्थव्यवस्था में उनका योगदान 10 प्रतिशत है.
कई सफल एशियाई उद्यमियों और पेशेवर लोगों को आईएपी ने ब्रिटेन के 100 सबसे अधिक प्रभावशाली लोगों की सूची में रखा है.
आईएपी के अध्यक्ष ख़ालिद डार का कहना है, "इनमें से ज़्यादातर लोग ऐसे हैं जो ख़ाली जेब के साथ भारत से आए थे."
वे कहते हैं, "उद्यम, कड़ी मेहनत की परंपरा और समाज में बेहतर मकाम बनाने की कोशिश ने ब्रिटेन की एशियाई उद्यमी बिरादरी को हमेशा प्रेरित किया है."
यह अध्ययन ऐसे समय आया है जबकि ब्रिटेन में बम हमलों के बाद एशियाई समाज को कई सवालों का जवाब देना पड़ रहा है.
जिन भारतीय उद्यमियों को इस सूची में शामिल किया गया है उनमें स्टील की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी के मालिक लक्ष्मी मित्तल और सर गुलाम नून भी हैं.
सर गुलाम नून की कंपनी हर सप्ताह 12 लाख डिब्बे तैयार भारतीय खाना बेचती है.
सबसे प्रभावशाली ब्रितानी लोगों की सूची में वकील इमरान ख़ान और भारतीय मूल की अभिनेत्री मीरा स्याल का नाम भी है.
इससे पहले कुछ ऐसे भी अध्ययन प्रकाशित हुए थे जिनमें कहा गया था कि ब्रिटेन में जातीय स्तर पर कई समाज हाशिए पर हैं जिनमें एशियाई समुदाय भी है.
इसी सप्ताह प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि पाकिस्तानी और बांग्लादेशी समुदाय के लोग ब्रितानी समाज की मुख्यधारा से कटते जा रहे हैं.
शोध करने वालों ने पाया कि लंदन और ब्रैडफ़र्ड ब्रिटेन के दो ऐसे शहर हैं जहाँ जातीय समुदाय और ब्रितानी समाज के बीच बहुत कम संवाद है.