शनिवार, 18 जून, 2005 को 01:59 GMT तक के समाचार
संजीव श्रीवास्तव
बीबीसी संवाददाता
भारत के सबसे बड़े औद्योगिक घराने रियालंस समूह में मालिकाना हक़ को लेकर अंबानी बंधुओं मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच पिछले कुछ महीनों से चल रहा विवाद ख़त्म हो गया है.
अनिल अंबानी ने बीबीसी को बताया कि शनिवार सुबह साढ़े पाँच बजे बँटवारे पर अंतिम फ़ैसला हो गया. उन्होंने बताया कि अब संपत्ति और कंपनियों का बँटवारा हो गया है.
बँटवारे का फ़ैसला अंबानी परिवार की बैठक में किया गया. बैठक में मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी और उनकी माँ कोकिलाबेन के साथ-साथ धीरूभाई अंबानी की दोनों बेटियाँ भी मौजूद थीं.
कोकिलाबेन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि रिलायंस समूह को लेकर सभी मुद्दे सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिए गए हैं.
शनिवार को रिलायंस समूह के निदेशक मंडल की एक विशेष बैठक हुई जिसमें बँटवारे की रूपरेखा पर औपचारिक मुहर लगा दी गई.
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रिलायंस के सौहार्दपूर्ण बँटवारे पर खुशी जाहिर की है.
चिदंबरम ने कहा कि दोनों भाइयों के बीच स्वामित्व का विवाद सुलझ गया है. उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि दोनों भाई अपने पिता के साम्राज्य को आगे बढ़ाएँगे.
वित्त मंत्री ने कहा कि इस बात को लेकर उन्हें प्रसन्नता है कि दोनों एक समझौते पर पहुँच गए हैं और उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों रिलायंस के लाखों शेयर धारकों के हितों का ध्यान रखेंगे.
समझौता
कोकिलाबेन के अनुसार रिलायंस समूह की फ़्लैगशिप कंपनी रिलायंस इंड्रस्ट्रीज़ और आईपीसीएल मुकेश अंबानी के पास रहेंगी जबकि अनिल अंबानी को रिलायंस इन्फ़ोकॉम, रिलायंस एनर्जी और रिलायंस कैपिटल मिलेंगी.
समझौते के अनुसार रिलायंस इंड्रस्ट्रीज के उपाध्यक्ष पद से अनिल अंबानी का इस्तीफ़ा दे दिया है.
अनिल अंबानी के अनुसार वह आज से एक नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं. रिलायंस समूह में एक लाख करोड़ की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ है. सात-आठ हज़ार करोड़ की रिलायंस एनर्जी है.
रिलायंस कैपिटल तीन हज़ार करोड़ की कंपनी है. इसके अलावा रिलायंस इन्फ़ोकॉम सहित कई अन्य कंपनियाँ भी हैं.
रिलायंस के मालिकाना हक़ को लेकर विवाद की ख़बर सबसे पहले पिछले साल नवंबर में आई थी.
शुरू में तो रिलायंस समूह के चेयरमैन और बड़े भाई मुकेश अंबानी ने छोटे भाई अनिल अंबानी से मतभेद की बात से इनकार किया था. लेकिन धीरे-धीरे दोनों भाइयों का विवाद खुल कर सामने आ गया.