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बुधवार, 25 मई, 2005 को 03:24 GMT तक के समाचार

कैस्पियन पाइपलाइन का सपना साकार

तुर्की, जॉर्जिया और अज़रबैजान के तेल उद्योग से जुड़े अधिकारी अमरीकी विदेश मंत्री कॉन्डोलीज़ा राइस के साथ अज़रबैजान की राजधानी बाकू में इकट्ठा हो रहे हैं जहाँ बाकू-तबलीसी-जेहन तेल पाइपलाइन खुल रही है.

अज़रबैजान से लगभग पाँच अरब बैरल तेल बाकू के तेल क्षेत्र से, जॉर्जिया और तुर्की के जेहन से होते हुए लगभग 1,750 किलोमीटर का रास्ता तय करके यूरोपीय तेल बाज़ार में पहुँचेगा.

इस क्षेत्र के नेताओं के लिए इस पाइपलाइन का बनना जैसे एक सपने का सच होना है.

कई वर्षों से यह परियोजना क्षेत्रीय नीतियों से प्रभावित होती रही है.

इस परियोजना ने युद्ध से प्रभावित इलाक़े को धन और समृद्धि का रास्ता दिखाया है, साथ ही संभावना है कि ये पश्चिमी देशों से उसके रिश्तों में मज़बूती लाने में मदद करेगा.

इस पाइपलाइन को बनाने का समझौता 1990 के दशक में हुआ था. अमरीका हमेशा चाहता रहा है कि कैस्पियन सागर पर रूस का पारंपरिक एकाधिकार ख़त्म हो इसलिए उसने इस पाइपलाइन को अपना पूरा समर्थन दिया.

मगर तेल कंपनियों को इस पाइपलाइन के निर्माण के लिए राज़ी करने में कई साल लगे थे.

रूस और ईरान जैसे देशों से जाने वाली इस पाइपलाइन के लिए तेल कंपनियों को अस्थिर राजनीति से भी निबटना पड़ा. बहरहाल, इस योजना को तैयार होने में भी दस वर्ष लगे.

इस पाइपलाइन को चलाने की मुख्य ज़िम्मेदारी ब्रिटिश पेट्रोलियम की है जिसका कहना है कि यह दुनिया की सबसे आधुनिक और सबसे जटिल पाइपलाइन है.

एक ओर जहाँ बड़े-बड़े नेता इस उदघाटन समारोह में भाग लेंगे वहीं कई लोगों का मानना है कि ख़ुशी मनाने की कोई बड़ी वजह नहीं है.

कैस्पियन सागर में अपेक्षा के विपरीत बहुत कम तेल है. वहीं पर्यावरणविदों ने ब्रिटिश पेट्रोलियम पर कई अतंरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

विश्लेषकों का मानना है कि इस पाइपलाइन की वजह से ही पश्चिमी देशों ने अज़रबैजान की सरकार को मानवाधिकारों के गिरते रिकॉर्ड के बावजूद अपना समर्थन दिया था.