बुधवार, 02 फ़रवरी, 2005 को 14:57 GMT तक के समाचार
भारत सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र में विदेशी कंपनियों की हिस्सेदारी को 74 प्रतिशत तक बढ़ाने के फ़ैसले को मंज़ूरी दे दी है.
अब तक विदेशी कंपनियाँ दूरसंचार क्षेत्र में सिर्फ़ 49 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी हासिल कर सकती थीं.
सरकार ने विदेशी हिस्सेदारी का प्रतिशत तो बढ़ाया है, लेकिन कड़ी शर्तों के साथ.
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पत्रकारों को बताया कि विदेशी कंपनियाँ 74 प्रतिशत तक निवेश तो कर सकेंगी लेकिन उनके प्रबंध निदेशक और चेयरमैन का निवासी भारतीय नागरिक होना ज़रूरी है.
कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी और वित्त अधिकारी भी निवासी भारतीय नागरिक होना ज़रूरी है, वित्त मंत्री ने कहा कि दूसंचार विभाग के पास पूरे अधिकार होंगे कि वे इन नियमों का पालन करवा सकें.
वित्त मंत्री ने बताया कि भारत में दूरसंचार के क्षेत्र में 74 प्रतिशत निवेश करने वाली कंपनी को अपना सारा ब्यौरा देना होगा कि किसने पैसा लगाया है, विदेशी निवेश हासिल करने वाली भारतीय कंपनी को भी वर्ष में दो बार प्रमाण देना होगा कि विदेशी निवेश 74 प्रतिशत की सीमा के अंदर है.
यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि निवेश करने वाली कंपनी चाहे जिस किसी देश की हो, इस मामले में क़ानून भारत का ही लागू होगा.
वामपंथी दल
वामपंथी दल इस तरह के विदेशी निवेशों के विरोधी के रूप में देखे जाते हैं, कई वामपंथी नेताओं ने पहले भी इस तरह के निर्णयों की आलोचना की है.
वित्त मंत्री ने कहा, "हमने सभी संबद्ध मंत्रालयों से इस बारे में विचार-विमर्श किया, हमने वामपंथियों सहित सरकार को समर्थन देने वाले दलों से भी बातचीत की."
पी चिदंबरम ने कहा, "हमने वामपंथी दलों को आश्वस्त किया है कि देश की सुरक्षा को लेकर उनकी जो आशंकाएँ हैं उनका पूरी तरह से निराकरण किया जाएगा, इसके लिए रक्षा और गृह मंत्रालय के विशेषज्ञों से भी राय ली जाएगी."
उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, सुरक्षा एजेंसियों, वैज्ञानिकों और मंत्रालयों से पूरे विचार-विमर्श के बाद इसके लिए शर्तों की रूपरेखा तैयार की है."
वित्त मंत्री ने कहा कि शर्तों का पालन नहीं करने वाली कंपनी की बैंक गारंटी ज़ब्त की जा सकती है और भारत सरकार कंपनी को होने वाले नुक़सान के लिए ज़िम्मेदार नहीं होगी.
नियमों के अनुसार, इन कंपनियों को यह अधिकार नहीं होगा कि वे भारत से किए जाने वाले फ़ोन कॉलों को किसी और देश के ज़रिए रूट कर सकें.
कंपनी को अपने सभी ग्राहकों का ब्यौरा ज़रूरत पड़ने पर भारत सरकार को उपलब्ध कराना होगा.