मंगलवार, 21 दिसंबर, 2004 को 21:44 GMT तक के समाचार
भारत की एक निजी एयरलाइंस कंपनी एयर डेकन ने अपना काफ़िला बढ़ाने की घोषणा की है.
भारत की पहली कम ख़र्च वाली एयरलाइंस एयर डेकन ने तीस नई एयरबस - ए320 ख़रीदने का सौदा किया है जिसपर क़रीब एक अरब अस्सी करोड़ डॉलर की लागत आएगी.
एयर डेकन की शुरूआत पिछले साल हुई थी और उसका मक़सद यात्रियों को रेलवे और कुछ अन्य विमान सेवाओं से हटाकर अपनी ओर खींचना है.
एयर डेकन का गठन सेना अधिकारी और रेशम के किसान गोरूर गोपीनाथ ने किया था और उनका उद्देश्य पाँच साल में साठ विमानों का काफ़िला तैयार करना है.
ऐसा कहा जा रहा है कि एयरलाइन अपने विस्तार में सहायता और धन जुटाने के लिए 25 प्रतिशत शेयर बाज़ार में भी उतार सकती है जिसके ज़रिए क़रीब पाँच करोड़ डॉलर जुटाए जाएंगे.
एयर डेकन जब शुरू हुई थी तब इसने अन्य विमान सेवाओं के मुक़ाबले आधी क़ीमत में टिकट बेचे थे. कंपनी का कहना है कि वह यूरोप की कुछ सस्ती विमान सेवाओं की तर्ज़ पर अपना कारोबार लेकर चल रही है.
यूरोप में आयरलैंड की रॉयन एयर विमान सेवा काफ़ी सस्ती है.
बढ़ता बाज़ार
भारत में हवाई यात्रा के बढ़ते बाज़ार ने देश-विदेशों में विमान सेवाओं का काफ़ी ध्यान खींचा है.
उद्योगपति विजय माल्या ने हाल ही में किंगफ़िशर एयरलाइन शुरू की थी जबकि ब्रिटेन के उद्योगपति रिचर्ड ब्रैन्सन ने भी भारत में एयरलाइन शुरू करने की इच्छा जताई है.
भारत की आबादी एक अरब से ज़्यादा है और पर्यवेक्षकों का कहना है कि ज़्यादातर लोग विमान में सफ़र नहीं कर सकते.
लेकिन हाल के दिनों में अर्थव्यवस्था में सुधार के माहौल में लोगों की ख़र्च करने की क्षमता बढ़ी है. भारत सरकार ने भी सस्ते और सुविधाजनक हवाई सफ़र को अपना समर्थन दिया है.
पूर्व केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा भी था, "अब वो दिन लद गए हैं जब हवाई सफ़र करना सिर्फ़ महाराजाओं या धनी लोगों का प्रतीक माना जाता था."
भारत में निजी विमान सेवाओं के बढ़ने वाले यातायात की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढाँचा बढ़ाया जा रहा है और समाचार एजेंसी एएफ़पी ने मंगलवार को ख़बर दी है कि जर्मनी की सीमेंस कंपनी की अगुवाई वाले एक समूह ने बंगलौर में एक निजी हवाई अड्डा बनाने का ठेका हासिल कर लिया है.