भारत में महँगाई की दर इस साल अगस्त के अंत तक 8.33 प्रतिशत पहुँच गई. ये पिछले चार साल में सबसे ज़्यादा है.
पिछले साल अगस्त के अंत तक महँगाई की दर 3.88 प्रतिशत थी.
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि देश में कुछ जगह बारिश का पर्याप्त मात्रा में न होना और कुछ जगह पर बाढ़ आ जाने के साथ-साथ पेट्रोल, डीज़ल जैसे पदार्थों की कीमत में वृद्धि के कारण ऐसा हुआ है.
पिछले कुछ हफ़्तों से महँगाई की दर लगातार बढ़ रही है और ये पेट्रोल, डीज़ल पर कर की कटौती के बावजूद हो रहा है.
भारत में ख़पत होने वाले तेल का लगभग 70 प्रतिशत आयात किया जाता है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार भारतीय उद्योग परिसंघ सीआईआई के आर्थिक सलाहकार टी के भौमिक का कहना है, "सत्ता में आने के बाद यूपीए सरकार के लिए ये सबसे गंभीर आर्थिक चुनौती है."
पेंशन पाने वालों और अपनी बचत पर मिलने वाले ब्याज पर आश्रित लोगों के बारे में चिंता जताई जा रही है क्योंकि बैंकों में की गई बचत पर मिलने वाले ब्याज की दर इस समय महँगाई दर से कम है.
डाकख़ाने की कई स्कीमों जैसे लंबे समय की बचत, किसान विकास पत्र इत्यादी में ज़रूर महँगाई दर से कुछ ज़्यादा ब्याज मिलता है.
इससे पहले वर्ष 2003-2004 के आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया था कि इस साल महँगाई की दर लगभग पाँच प्रतिशत रहेगी.