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शनिवार, 31 जुलाई, 2004 को 11:45 GMT तक के समाचार

आतंकवाद के ख़िलाफ़ साझा मंच पर ज़ोर

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आतंकवाद का सामना करने के लिए साझा मंच बनाया जाने पर ज़ोर दिया है.

शनिवार को 'बिमस्टेक' देशों के शिखर सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने कहा कि धार्मिक कट्टरपंथ से पैदा होने वाले ख़तरों से भी नेताओं को होशियार रहना चाहिए.

भारत, बांग्लादेश, बर्मा, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान के इस संगठन की पहली बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने ये विचार व्यक्त किए.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "यदि आतंकवाद, अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मसलों का सामना करने के लिए साझा मंच बनता है तो बिमस्टेक देशों का आपस में विश्वास बढ़ेगा."

उनका कहना था, "आतंकवाद से हम सब को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जूझना है और यह ही आज की असलीयत है. ये युद्धक्षेत्र हमारे और क़रीब आता जा रहा है."
 आतंकवाद से हम सब को आंतरराष्ट्रीय स्तर पर जूझना है. धार्मिक कट्टरपंथ से बढ़ती असहनशीलता समाज और लोगों को बाँट सकती है. इसे नज़रअंदाज़ करना ख़तरा मोल लेना होगा
 
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "धार्मिक कट्टरपंथ से बढ़ती असहनशीलता समाज और लोगों को बाँट सकती है और यदि हम इसे नज़रअंदाज़ करते हैं तो ख़तरा मोल ले रहे हैं."

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक माहौल में असुरक्षा बढ़ रही है जिससे सभी देशों का काम और पेचीदा हो गया है.

उनका कहना था कि इन परिस्थितियों में संयुक्त परियोजनाओं को अंजाम देना मुश्किल है और आर्थिक विकास, शांति और स्थिरता की राह में बाधाओं को दूर करने के लिए सरकारों को एकजुट होना होगा.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देयुबा ने अपने भाषणों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सहमति जताई.